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ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2026: 122 देशों में भारत 100वें स्थान पर, बच्चों में कुपोषण के आंकड़े चिंताजनक

By Sushil Sah 
Updated Date

नई दिल्ली। विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल देश भारत में भूख और कुपोषण की स्थिति एक बार फिर चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्लोबल हंगर इंडेक्स (Global Hunger Index) 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, 122 देशों की सूची में भारत 100वें स्थान पर है। भारत को इस रिपोर्ट में 24.1 का स्कोर मिला है और उसे भूख की ‘गंभीर’ श्रेणी में रखा गया है।

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क्या कहती है रिपोर्ट?

ग्लोबल हंगर इंडेक्स में लोगों को पर्याप्त भोजन मिलने के साथ—साथ कुपोषण और बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े संकेतकों के आधार पर भी स्थिति का आकलन होता है। इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत की करीब 9.8 प्रतिशत आबादी अल्पपोषण से प्रभावित है। इसका मतलब है कि इन लोगों को स्वस्थ जीवन के लिए जरूरी पर्याप्त कैलोरी नहीं मिल पा रही है।

बच्चों के पोषण को लेकर क्या हैं आंकड़े?

इस रिपोर्ट में पांच साल से कम उम्र के बच्चों के पोषण से जुड़े आंकड़े भी काफी चिंताजनक हैं। इन बच्चों में चाइल्ड स्टंटिंग का मामला देखने को मिला है। यानी लगभग 29.3 प्रतिशत बच्चों की उम्र के हिसाब से उनकी लंबाई कम है। यह लंबे समय तक पोषण की कमी का संकेत हो सकता है। इसके अलावा चाइल्ड वेस्टिंग का भी मामला सामने आया है जिसमें लगभग 19 प्रतिशत बच्चों का वजन उनकी लंबाई के अनुपात में कम है। यह तीव्र कुपोषण का संकेत हो सकता है। इन सभी समस्याओं के अलावा अल्पपोषण का मामला भी सामने आता है। इसमें लगभग 9.8 प्रतिशत आबादी का वह हिस्सा जिसे पर्याप्त कैलोरी नहीं मिल पा रही है।

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क्यों अहम है ग्लोबल हंगर इंडेक्स?

बता दें कि भूख और कुपोषण का असर केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव बच्चों के शारीरिक विकास, सीखने की क्षमता और भविष्य पर भी पड़ सकता है। इसलिए पोषण योजनाओं, खाद्य सुरक्षा और बच्चों तक पौष्टिक भोजन पहुंचाने की व्यवस्था की अहम भूमिका है।

निष्कर्ष

ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2026 में भारत की 100वीं रैंकिंग और बच्चों में स्टंटिंग व वेस्टिंग के बताए गए आंकड़े पोषण की सबसे बड़ी चुनौती को बताते हैं। हालांकि, किसी देश की पूरी खाद्य सुरक्षा स्थिति को समझने के लिए इस सूचकांक के साथ अन्य सरकारी आंकड़ों और पोषण सर्वेक्षणों को भी देखना बेहद जरूरी है।

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