नई दिल्ली। देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Droupadi Murmu) 79वें स्वतंत्रता दिवस (79th Independence Day) की पूर्व संध्या पर गुरुवार को 24 मिनट तक राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि पहलगाम आतंकी हमला (Pahalgam Terrorist Attack) कायराना था। ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) में सेना ने सीमा पार आतंकियों के गढ़ को खत्म किया। मुर्मू ने कहा कि भारत लोकतंत्र की जननी, हमारे लिए संविधान सर्वोपरि है। कल जब हम अपने तिरंगे सलामी दे रहे होंगे। उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों को भी श्रद्धांजलि दे रहे होंगे।
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LIVE: President Droupadi Murmu's address to the nation on the eve of the 79th Independence Day https://t.co/AiBSvUP5La
— President of India (@rashtrapatibhvn) August 14, 2025
उन्होंने कहा, हमारे द्वारा अपनाए गए संविधान की आधारशिला पर हमारे लोकतंत्र का भवन निर्मित हुआ है। हमने लोकतंत्र पर आधारित ऐसी संस्थाओं का निर्माण किया। जिससे लोकतांत्रिक कार्यशैली को मजबूती मिली। हमारे लिए हमारा संविधान और हमारा लोकतंत्र सर्वोपरि है। राष्ट्रपति ने कहा कि कश्मीर घाटी में रेल सर्विस शुरू होना बड़ी उपलब्धि है। इससे उस क्षेत्र में व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। 55 करोड़ लोगों को आयुष्मान योजना का लाभ मिला है।
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हमें नहीं भूलनी चाहिए विभाजन की पीड़ा
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि हमारे लोकतंत्र पर आधारित ऐसी संस्थाओं का निर्माण किया जिनसे लोकतांत्रिक कार्यशैली को मजबूती मिली। हमारे लिए हमारा संविधान और लोकतंत्र सर्वोपरी है। विभाजन की पीड़ा हमें कभी नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि आज हमने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया। विभाजन के कारण भयावह हिंसा देखी गई और लाखों लोग विस्थापित होने के लिए मजबूर किए गए। आज हम इतिहास की गलतियों के शिकार हुए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि बलिदान के बल पर 78 साल पहले 15 अगस्त के दिन भारत ने आजादी हासिल की थी। उन्होंने कहा कि आजादी को वापस पाने के बाद हम एक ऐसे मार्ग पर बढ़े जिसमें सभी वयस्कों को मतदान का अधिकार था। दूसरे शब्दों में कहें तो हमने अपनी नियति को स्वरूप देने का अधिकार खुद को दिया। अनेक लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में जेंडर, धर्म और अन्य आधारों पर लोगों के वोट डालने पर पाबंदियां होती थीं। लेकिन हमने ऐसा नहीं किया। चुनौतियों के बावजूद भारतीयों ने लोकतंत्र को सफलतापूर्वक अपनाया।
15 अगस्त की तारीख हमारी सामूहिक स्मृति में गहराई से अंकित है। औपनिवेशिक शासन की लंबी अवधि के दौरान देशवासियों की अनेक पीढ़ियों ने यह सपना देखा कि एक दिन देश स्वाधीन होगा। देश के हर हिस्से में रहने वाले सभी लोगों ने विदेशी शासन की बेड़ियों को तोड़ फेंकने के लिए व्याकुल थे।
‘न्याय, स्वतंत्रतता,समता और बंधुत्व- संविधान के चार मूल्य’
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प्यारे देशवासियों, हमारे संविधान में ऐसे चार मूल्यों का उल्लेख है, जो हमारे लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाए रखने वाले चार स्तंभ हैं। ये मूल्य हैं- न्याय, स्वतंत्रतता,समता और बंधुत्व। ये हमारी सभ्यता के ऐसे सिद्धांत हैं, जिन्हें हमने स्वाधीनता संग्राम के दौरान पुन: जीवंत बनाया। मेरा मानना है कि इन सभी मूल्यों के मूल में व्यक्ति की गरिमा की अवधारणा विद्यमान है।
सभी समान, सबके साथ हो गरिमापूर्ण व्यवहार
प्रत्येक व्यक्ति समान है और सभी को यह अधिकार है कि उनके साथ गरिमापूर्ण व्यवहार हो। स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा-सुविधाओं तक, सभी की समान पहुंच होनी चाहिए। सभी को समान अवसर मिलने चाहिए। जो लोग पारंपरिक व्यवस्था के कारण वंचित रह गए थे। उन्हें मदद की जरूरत थी। इन सिद्धांतों को सर्वोपरि रखते हुए हमने 1947 में हमने एक नई यात्रा शुरू की।