मुंबई। चेक बाउंस केस (check bounce case) में चल रही कानूनी मुश्किलों के बीच अभिनेता राजपाल यादव (Actor Rajpal Yadav) ने इंडस्ट्री में फिल्म फाइनेंसिंग के तरीकों को लेकर अपनी बड़ी चिंताएं ज़ाहिर की हैं। राजपाल यादव ने फिल्म इंडस्ट्री के अंदर फाइनेंशियल एग्रीमेंट को स्टैंडर्ड बनाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। यहां तक कि फिल्म फेडरेशन से एक फॉर्मल इन्वेस्टमेंट फंड और एक कॉन्ट्रैक्ट फ्रेमवर्क बनाने की अपील की जो फाइनेंस सोर्स, आर्टिस्ट और यहां तक कि प्रोडक्शन हाउस को भी कंट्रोल करेगा।
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अभिनेता राजपाल यादव ने कहा कि मैं पूरे फिल्म फेडरेशन (Film Federation) से रिक्वेस्ट करता हूं कि फिल्म फाइनेंस के लिए एक इन्वेस्टमेंट फंड पर सहमत हों। उन्हें एक बेसिक प्लेटफॉर्म बनाना चाहिए, जिसे विदेशी इन्वेस्टर और एक्टर दोनों को फॉलो करना चाहिए। अगर ऐसा होता है, तो यह बहुत आसान होगा। राजपाल यादव को 9 रुपए करोड़ के चेक बाउंस केस में अंतरिम ज़मानत दी गई थी, जो 2010 में उनकी फिल्म अता पता लापता के लिए लिए गए पांच करोड़ रुपए के लोन से जुड़ा था। बिज़नेसमैन माधव गोपाल (Businessman Madhav Gopal) अग्रवाल द्वारा दिए गए लोन पर ब्याज और पेनल्टी जुड़कर 9 करोड़ रुपए करोड़ हो गए है। राजपाल यादव को 1.5 करोड़ रुपये जमा करने के बाद अंतरिम ज़मानत मिल गई है, कोर्ट ने 18 मार्च तक ज़मानत दी है। उन्होंने खुद को बेगुनाह बताया है और कहा है कि डील के पीछे का इरादा गलत इरादे से नहीं, बल्कि एक गलतफहमी थी। अपनी कानूनी मुश्किलों के बारे में बात करते हुए अभिनेता राजपाल यादव ने कहा कि मुझे काम करते हुए 26 साल हो गए हैं। इस दौरान कम से कम 200 एग्रीमेंट हुए हैं। अगर मैंने एग्रीमेंट पर लड़ाई लड़ी होती, तो मेरे पास सिर्फ़ एक केस क्यों है। मैं यह बार-बार कह रहा हूं कि कोई भी मशीन हो, मुझसे पूछा गया है कि पांच करोड़ रुपए कहां से आते हैं और कहां जाते हैं। मैं 1500 करोड़ रुपये का आदमी हूं। मैं कह रहा हूं कि, इस फिल्म के पीछे जो भी है, मैं उसका सपोर्ट करने को तैयार हूं। लेकिन इस फिल्म के पीछे पांच करोड़ रुपए का इरादा गलत है। पैसे लेकर लोगों को फंसाना गलत है।