नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नज़दीक आ रहे हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी पर आगामी चुनावों को रद्द करवाने और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की साज़िश रचने का आरोप लगाया। सागरदिघी में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए सीएम बनर्जी ने दावा किया कि मालदा में हुई उस घटना के पीछे भाजपा का हाथ था, जहां बुधवार को ग्रामीणों ने सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बना लिया था। उन्होंने कहा कि अभी प्रशासन मेरे नियंत्रण में नहीं है। कानून-व्यवस्था चुनाव आयोग द्वारा नियंत्रित किया जा रहा है। सीएम ने आरोप लगाते हुए कहा कि आयोग गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों के अनुसार काम करते हैं। मुख्य सचिव और गृह सचिव से लेकर सभी अधिकारियों को बदल दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की योजना चुनाव रद्द करने और ज़बरदस्ती बंगाल पर कब्ज़ा करने की है।
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा ने कई तरीकों से लोगों को भड़काने की कोशिश की है। उनकी योजना चुनाव रद्द कराने की है। अगर ऐसा होता है, तो किसी को भी वोट देने का अधिकार नहीं रहेगा। वह ज़बरदस्ती बंगाल पर कब्ज़ा कर लेंगे। चुनाव आयोग ने मेरी शक्तियां छीन ली हैं। गृह मंत्री और राज्यपाल की मदद से एक सुपर राष्ट्रपति शासन लगा दिया है। पश्चिम बंगाल की सीएम ने दावा किया कि उन्हें मालदा की घटना के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं थी और उन्हें एक पत्रकार से इसके बारे में पता चला। उन्होंने स्वीकार किया कि मौजूदा मुख्य सचिव ने उनसे एक बार भी संपर्क नहीं किया है। बनर्जी ने कहा कि मुझे नहीं पता कि मालदा में कल की घटना के पीछे कौन था। मेरे पास कोई जानकारी नहीं है। मौजूदा गृह सचिव ने मुझे एक बार भी फोन नहीं किया है। मुझे एक पत्रकार से पता चला कि जजों को घेरा गया है। मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर में लोगों में असंतोष है। लोग भाजपा की चालबाज़ी का शिकार हो गए हैं। पश्चिम बंगाल में एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है, क्योंकि बुधवार को मालदा ज़िले में ग्रामीणों ने तीन महिलाओं सहित सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बना लिया था। यह गतिरोध चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूचियों से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के कारण शुरू हुआ था। यह घटना विरोध प्रदर्शनों की एक बड़ी लहर का हिस्सा थी, जिसने पूरे दिन मालदा को ठप कर दिया; प्रदर्शनकारियों ने कम से कम पांच विधानसभा क्षेत्रों में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों तथा प्रमुख ग्रामीण मार्गों पर सड़कों को जाम कर दिया। इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने आज मालदा की घटना को न्याय प्रशासन में बाधा डालने का एक बेशर्मी भरा और जान-बूझकर किया गया प्रयास बताया।