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फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट में मामले के जानकारों का हवाला देते हुए कहा गया है कि इस प्रस्ताव में अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (International Energy Agency) के माध्यम से रणनीतिक भंडार की संयुक्त रूप से रिहाई शामिल होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि अब तक, अमेरिका समेत तीन जी7 सदस्यों ने इस विचार का समर्थन किया है। बताया जा रहा है कि अन्य सदस्य समन्वित कदम उठाने से पहले बाजार की स्थितियों का आकलन कर रहे हैं।
इसके साथ ही कुछ अमेरिकी पॉलिसीमेकर्स का कहना है कि आपातकालीन क्रूड रिजर्व (Emergency Crude Reserve)से करीब 300 मिलियन से 400 मिलियन बैरल तेल को सहमति के आधार पर निकाला जा सकता है। यह आईईए (IEA) सदस्य देशों के स्ट्रेटेजिक रिजर्व (Strategic Reserve) में रखे लगभग 1.2 बिलियन बैरल तेल का करीब 25 से 30 प्रतिशत होगा।
बता दें कि मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। सोमवार को एशियाई ट्रेडिंग के दौरान इंटरनेशनल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (International benchmark Brent crude) की कीमतों में 24 प्रतिशत उछाल दर्ज किया गया। इसके बाद ये 116.71 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। जबकि WTI क्रूड की कीमत में 28 फीसदी की तेजी दर्ज की गई और ये 116.45 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
बता दें कि क्रूड की कीमतों में भारी उछाल के चलते ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट में भी उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। सोमवार को कई एशियाई शेयर बाजारों (Asian stock markets) में भारी गिरावट दर्ज की गई।
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क्रूड की बढ़ती कीमतों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) का बड़ा बयान सामने आया। ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट किया। जिसमें उन्होंने लिखा, “ईरान का न्यूक्लियर खतरा खत्म होने के बाद शॉर्ट-टर्म तेल की कीमतें तेजी से गिरेंगी। यह अमेरिका और दुनिया की सुरक्षा और शांति के लिए चुकाई जाने वाली एक छोटी सी कीमत है।”