नई दिल्ली। भारत के केंद्रीय इस्पात मंत्रालय ने नई दिल्ली में 16-17 अप्रैल को होने वाली एक वैश्विक इस्पात कॉन्फ्रेंस को टाल दिया है। मंत्रालय ने इसका कारण मध्य-पूर्व संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय भागीदारी में आ रही रुकावटों को बताया है। बुधवार को इस्पात मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि पश्चिम एशिया संकट सहित बदलती वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए, कई प्रतिनिधि, वक्ता, प्रदर्शक और अन्य हितधारकों को यात्रा, लॉजिस्टिक्स, समय-निर्धारण और अन्य संबंधित व्यवस्थाओं के संबंध में काफी असुविधा और कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
पढ़ें :- संघर्ष- विराम को लेकर ब्रिटेन की विदेश सचिव यवेट कूपर का बयान, कहा- युद्ध में लेबनान का हुआ बहुत बड़ा नुकसान
मध्य-पूर्व में यह संघर्ष 28 फरवरी को तब शुरू हुआ, जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमले किए। इसके बाद से तेहरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है और इस क्षेत्र के अन्य देशों में स्थित ठिकानों पर हमले किए हैं। इससे पहले जारी एक अलग बयान में सरकार ने कहा कि इस्पात क्षेत्र को ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों से निपटना होगा। भले ही यह उम्मीद की जा रही है कि मांग में मज़बूती बने रहने के कारण यह क्षेत्र अपनी विकास की गति को बनाए रखेगा। पश्चिम एशिया में जारी संकट के चलते यात्रा और लॉजिस्टिक्स में आ रही दिक्कतों के कारण विदेशी प्रतिनिधियों की भागीदारी प्रभावित हो रही थी। यह कार्यक्रम भारत मंडपम, नई दिल्ली में होने वाला था। यह निर्णय सभी हितधारकों (stakeholders) के हित में लिया गया है। सम्मेलन की नई तारीखों की घोषणा बाद में की जाएगी। यह एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम था जिसका उद्देश्य स्टील इकोसिस्टम के दिग्गजों को एक साथ लाना था।