नई दिल्ली। पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा डिसपैरिटी रिडक्शन अलाउंस (Disparity Reduction Allowance) लागू करने की मांग को लेकर होने वाले धरने को रोकने के बाद क्वेटा में दर्जनों सरकारी कर्मचारियों को हिरासत में ले लिया गया। द बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार विरोध प्रदर्शन को शहर के हाई-सिक्योरिटी रेड ज़ोन (High-security red zone) तक पहुंचने से रोक दिया गया है, जिसे रात भर कंटेनरों और भारी पुलिस बल की तैनाती करके सील कर दिया गया था। कर्मचारियों के संगठनों के एक गठबंधन द्वारा प्रांतीय सरकार (provincial government) पर लंबे समय से लंबित वित्तीय मांगों को पूरा करने का दबाव बनाने के लिए धरने की घोषणा के बाद पूरे बलूचिस्तान से कर्मचारी प्रांतीय राजधानी पहुंचे थे।
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विरोध अभियान ने पहले ही नियमित प्रशासनिक काम को बाधित कर दिया था, जिससे हाल के दिनों में कई सरकारी विभाग कम क्षमता पर काम कर रहे थे। जिला प्रशासन ने रेड ज़ोन की ओर जाने वाले सभी प्रमुख प्रवेश द्वारों को बंद करने के लिए तेजी से कार्रवाई की, जिससे प्रदर्शनकारियों का रास्ता प्रभावी ढंग से बंद हो गया। जब प्रदर्शनकारी आगे नहीं बढ़ पाए, तो कई लोगों ने क्वेटा प्रेस क्लब (Quetta Press Club) के बाहर फिर से इकट्ठा होने की कोशिश की। हालांकि, पुलिस ने भीड़ को इकट्ठा होने से रोक दिया और मौके पर ही दर्जनों कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया। स्थिति और बिगड़ने पर, अधिकारियों ने विरोध प्रदर्शन के दिन क्वेटा और आसपास के इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को निलंबित कर दिया। निवासियों ने बताया कि इस बंद से गंभीर व्यवधान हुआ, जिससे संचार, ऑनलाइन बैंकिंग, नेविगेशन सेवाओं और आवश्यक जानकारी तक पहुंच प्रभावित हुई। इस व्यापक निलंबन की नागरिक समाज के सदस्यों ने आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस कदम ने एक शांतिपूर्ण श्रम विरोध के लिए शहर की आबादी को सामूहिक रूप से दंडित किया। गिरफ्तारियों के बाद, बलूचिस्तान ग्रैंड अलायंस ने जेल भरो आंदोलन की घोषणा की, जिसमें सरकारी कर्मचारियों से राज्य की कठोर कार्रवाई के विरोध में गिरफ्तारी देने का आह्वान किया गया। गठबंधन ने चेतावनी दी कि हिरासत और प्रतिबंध प्रतिरोध को दबाने के बजाय केवल तेज करेंगे। दमन का बचाव करते हुए अधिकारियों ने दावा किया कि रेड ज़ोन लॉकडाउन और इंटरनेट निलंबन नियोजित प्रदर्शन के मद्देनजर उठाए गए एहतियाती सुरक्षा कदम थे।