Guru Grah Ke Atichari Gati : देव गुरु बृहस्पति 14 मई की रात में मिथुन राशि में गोचर कर जाएंगे। गुरु लगभग एक साल में राशि परिवर्तन करते हैं, लेकिन 2025 में 5-6 महीनों के बाद ही गुरु राशि परिवर्तन कर देंगे। जब भी गुरु सामान्य गति से तेज चलने लगते हैं तो उनकी गति को अतिचारी गति कहा जाता है।यहां गुरु की अतिचारी चाल का अर्थ है कि गुरु जिस राशि में मौजूद हैं, वहां सामान्य चाल ना चलकर बहुत तेजी से गोचर कर रहे हों। ऐसी स्थिति बहुत कम ही बनती है। गुरु अक्टूबर के महीने में कर्क राशि में गोचर कर जाएंगे। इसके बाद दिसंबर में वक्री चाल चलते हुए वापस मिथुन में आ जाएंगे। आइये जानते है गुरु की अतिचारी गति और इसके प्रभाव के बारे में ।
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साल 2025 में गुरु का अगला राशि परिवर्तन कर्क राशि में 18 अक्टूबर, शनिवार को 9.39 मिनट पर होगा। वहीं इसी वर्ष गुरु का आखिरी परिवर्तन 5 दिसंबर, शुक्रवार को दोपहर को 3.38 मिनट पर होगा। गुरु ग्रह की यह अतिचारी चाल 2032 तक रहेगी।
अतिचारी गुरु का प्रभाव
गुरु को ज्योतिष में शुभ ग्रह माना जाता है और ये सुख-वैभव, रोजगार, विवाह, ज्ञान, व्यापार आदि के कारक माने जाते हैं। गुरु की अतिचारी गति को ज्योतिष में अच्छा नहीं माना जाता। ज्योतिष के विद्वानों के अनुसार गुरु की अतिचारी गति के कारण देश-दुनिया में गंभीर स्थितियां पैदा हो सकती हैं। युद्ध के हालात बन सकते हैं, साथ ही आमजन को भी बाढ़, सूखा जैसी प्राकृतिक आपदाओं (natural calamities like drought) से नुकसान उठाना पड़ सकता है।
हालांकि गुरु के अतिचारी गति के दौरान कुछ लोगों को अच्छे परिणाम मिलने की बात को भी नकारा नहीं जा सकता। जिन लोगों की कुंडली में गुरु शुभ स्थिति में होते हैं या बलवान और कारक होते हैं, उन्हें अच्छे परिणाम भी गुरु की अतिचारी गति के चलते मिल सकते हैं। इस परिवर्तन से शिक्षा और मीडिया से लेकर तकनीक क्षेत्र पर प्रभाव पड़ेगा। बृहस्पति धनु और मीन राशि के स्वामी होते हैं। यह गोचर एक गतिशील परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करता है।