Holi 2023 Date, Shubh Muhurt : जीवन के रंगों के प्रतीक होली के रंग प्रेम , सौहादर्य और सामाजिक समरता के उदाहरण है। होलिका दहन के बाद होली खेलने की परंपरा बुराई पर अच्छाई की जीत है। सामाजिक उत्सव के रूप में मनाया जाने वाला होली का त्योहार समाज के अंग ,अंग में प्रेम और उल्लास बिखेरता है।फूलों की होली, प्रकृति के प्रति प्रेम और सम्मान का प्रतीक है। फूलों से खेले जाने वाली होली, ब्रज, मथुरा और बरसाना में बड़े ही धूमधाम से मनाई जाती है।
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रंगों वाली होली
पंचांग के अनुसार,इस साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि 13 मार्च को सुबह 10 बजकर 25 मिनट से आरंभ हो रही है। पूर्णिमा तिथि का समापन अगले दिन यानी 14 मार्च को दोपहर 12 बजकर 23 मिनट पर हो रहा है। चूंकि द्रिक पंचांग में उदया तिथि महत्वपूर्ण कही जाती है, इसलिए उदया तिथि के अनुसार होलिका दहन 13 मार्च के दिन होगा। होलिका दहन के बाद होली खेली जाती है। तो इस लिहाज से रंगों वाली होली 14 मार्च 2025 होगी।
टेसू के फूल
बिना रंग के होली की कल्पना ही नहीं की जा सकती है, लेकिन मुश्किल यह है कि इन रंगों में जो केमिकल पाए जाते हैं, वो हमारी त्वचा और आँखों के लिए बहुत हानिकारक होते हैं। ऐसी स्थिति में । हम Herbal Antibacterial , Antiallergic Eco-Friendly होली खेलें। प्रकृति में पाये जाने वाले विभिन्न सुगंधित फूलों,फलों , पौधों , चन्दन,आटे , बेसन , ग्वारपाठा ,नीम और हल्दी की मदद से घर बैठे सुगंधित आकर्षक व चटकीले रंग घर पर ही बना कर हम हर्बल इकोफ्रेंडली होली का मज़ा ले सकते हैं। भगवान कृष्ण को टेसू के फूल बेहद प्रिय थें इन्हें अर्पित करने से हर तरफ खुशियां फैलती हैं। साथ ही, इसकी खुशबू से तन और मन दोनों महक जाता है।
फूलों की होली
फूलों की होली, प्रकृति के प्रति प्रेम और सम्मान का प्रतीक है।
प्रकृति का सम्मान : फूलों की होली को प्रकृति के प्रति सम्मान और प्रेम का प्रतीक माना जाता है।
प्रेम और खुशी : रंगों की जगह फूलों का उपयोग किए जाने वाला यह त्योहार प्रकृति, प्रेम, खुशी और सामाजिक एकता का संदेश देता है और लोगों के बीच प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा देता है।
स्वास्थ्य और पर्यावरण : सिंथेटिक रंगों की तुलना में, फूलों का उपयोग स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए बेहतर है। फूलों की होली से त्वचा और आंखों को भी नुकसान नहीं पहुंचता और न ही पर्यावरण प्रदूषित होता है।
सामाजिक एकता : सामाजिक एकता का प्रतीक माने जाने वाला यह त्योहार किसी भी जाति, धर्म, और सामाजिक स्थिति की परवाह किए बिना सभी लोगों को एक साथ लाता है।