Holika Dahan 2025 : रंगों का त्योहार होली उत्सव पूरे देश में धूमधाम और रंग गुलाल के साथ मनाई जाती है। सदियों मनाए जाने वाली इस अनोखी परंपरा को पूरी दुनिया में मनाया जाता है। होली के त्योहार को मनाने का अध्यात्मिक और वैज्ञानिक लाभ है।होली त्यौहार के विविध रंग है। इन रंगों में अबीर गुलाल के साथ भाईचारे और पर्यावरण की शुद्धि का भी रंग दिखाई देता है। होली का त्योहार उस समय मनाया जाता है जब हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि होती है। बता दें कि मथुरा-वृंदावन समेत पूरे बृज में होली का उत्सव पूरे 40 दिनों तक चलता है।
पढ़ें :- Lucky Onyx Gemstone : गोमेद रत्न किन राशियों के लिए है शुभ , पहनने से पहले जरूर जानें ये सावधानियां
रंगों वाली होली
पंचांग के अनुसार,इस साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि 13 मार्च को सुबह 10 बजकर 25 मिनट से आरंभ हो रही है। पूर्णिमा तिथि का समापन अगले दिन यानी 14 मार्च को दोपहर 12 बजकर 23 मिनट पर हो रहा है। चूंकि द्रिक पंचांग में उदया तिथि महत्वपूर्ण कही जाती है, इसलिए उदया तिथि के अनुसार होलिका दहन 13 मार्च के दिन होगा। होलिका दहन के बाद होली खेली जाती है। तो इस लिहाज से रंगों वाली होली 14 मार्च 2025 होगी।
होलिका दहन
होली के पर्व में होलिका दहन की परंपरा का पालन किया जाता है। होलिका में सूखी लकड़ियों के साथ कुछ औषधीय वनस्पतियां और अन्य परंपरागत वस्तुएं पड़ती है।
लाल मिर्च का यह उपाय
अगर आप अपने घर को बुरी नजर और नकारात्मकता से बचाना चाहते हैं तो यानि होलिका दहन के दिन लाल मिर्च का यह उपाय जरूर अपनाएं। इसके लिए सूखी लाल मिर्च, सूखा नारियल और साबुत नमक लेकर आएं। इसके बाद एक नारियल, थोड़ा सा साबुत नमक और 5 लाल मिर्च हाथ में लेकर अपने घर के प्रत्येक सदस्य के सिर से पैर तक 7 बार एंटीक्लाकवाइज घुमाएं। फिर उसे एक कागज में बांध दें। अग्नि में डालने के बाद सीधा घर पर आ जाएं और पीछे मुड़कर न देंखे। मान्यता है कि इस उपाय को अपनाने से घर में आने वाली नकारात्मकता दूर होती है और बुरी नजर का प्रभाव समाप्त हो जाता है।
बंदनवार
वास्तुशास्त्र के अनुसार, घर के मुख्य द्वार पर बंदनवार यानी तोरण लगाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। इसलिए होली पर्व से पहले अपने घर पर मुख्य द्वार पर तोरण लगाएं। इससे से सकारात्मकता ऊर्जा का संचार बढ़ता है।