नई दिल्ली। इंदौर नगर निगम (Indore Municipal Corporation) के तरफ से सप्लाई किए गए दूषित पानी पीने से भागीरथपुरा इलाके (Bhagirathpura Area) में पिछले 10 दिनों में कम से कम दस लोगों की मौत हो गई है। 272 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और 2,800 से ज़्यादा लोग बीमार पड़ गए हैं। हालांकि सरकार ने अभी तक मौतों की सही संख्या की पुष्टि नहीं की है, लेकिन निवासियों का कहना है कि 14 लोगों की मौत हुई है। इस मुद्दे पर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव से दो हफ़्ते के अंदर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
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बता दें कि इंदौर ने स्वच्छ सर्वेक्षण सर्वे (Indore Swachh Survekshan Survey) में लगातार आठ सालों तक “भारत का सबसे स्वच्छ शहर” का खिताब जीत रहा है, जो एक रिकॉर्ड है। उसने नवी मुंबई और सूरत जैसे बड़े शहरों को पीछे छोड़ दिया है। हालांकि, हाल की घटना ने शहर के सैनिटेशन स्टैंडर्ड पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वरिष्ठ अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि इस वजह से दो अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है और एक को नौकरी से निकाल दिया गया है।
सरकार पानी में मिलावट की स्थिति पर रख रही है नज़र : डिप्टी सीएम
मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि राज्य सरकार इंदौर में पानी में मिलावट की घटना पर करीब से नज़र रख रही है और प्रभावित लोगों के सही इलाज के लिए सभी ज़रूरी कदम उठाए हैं। श्री शुक्ला ने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद अस्पतालों का दौरा कर रहे हैं, मरीज़ों और उनके परिवारों से मिल रहे हैं, और मेडिकल रिस्पॉन्स का जायजा लेने के लिए डॉक्टरों से बात कर रहे हैं।
श्री शुक्ला ने कहा कि मुख्यमंत्री खुद वहां मरीजों और उनके परिवारों से मिल रहे हैं। वह डॉक्टरों से भी बात कर रहे हैं। हमारे वरिष्ठ मंत्री, कैलाश विजयवर्गीय पिछले तीन दिनों से इंदौर में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। सरकार सबसे अच्छा इलाज सुनिश्चित करेगी, और संक्रमण के कारणों की जांच की जाएगी।
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पानी के सैंपल में बैक्टीरिया मिले
द हिंदू से बात करते हुए, इंदौर संभागीय कमिश्नर सुदाम खाड़े ने बताया कि 26 पानी के सैंपल में बैक्टीरियल संक्रमण पाया गया है। महात्मा गांधी मेमोरियल (MGM) मेडिकल कॉलेज ने इंदौर नगर निगम (IMC) को एक रिपोर्ट भेजी है। इलाके में अलग-अलग जगहों से 70 से ज़्यादा सैंपल लिए गए थे। इस खुलासे के बाद, IMC ने तुरंत कार्रवाई की और सप्लाई लाइन की पूरी सफाई की और लीकेज को ठीक किया। श्री खाडे ने कहा कि इलाके में क्लोरीन की गोलियां बांटी गई हैं और निवासियों को सलाह दी गई है कि पानी पीने से पहले उसे उबाल लें। उन्होंने यह भी कहा कि OPD में मरीजों की संख्या अब कम हो रही है।
NHRC ने स्वतः लिया संज्ञान
NHRC ने स्थिति का स्वतः संज्ञान लेते हुए पाया है कि इलाके में पीने के पानी की सप्लाई करने वाली मुख्य पाइपलाइन एक ‘सार्वजनिक शौचालय’ के नीचे से गुजर रही है, जिससे दिए जा रहे पानी की क्वालिटी खराब हो रही है। NHRC ने अपने नोटिस में कहा कि रिपोर्ट के अनुसार, निवासी कई दिनों से दूषित पानी की सप्लाई की शिकायत कर रहे थे, लेकिन अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य पाइपलाइन, जो इलाके में पीने के पानी की सप्लाई करती है, एक सार्वजनिक शौचालय के नीचे से गुजरती है। मुख्य लाइन में लीकेज के कारण, सीवेज का पानी कथित तौर पर पीने के पानी में मिल गया। इसके अलावा, इलाके में कई पानी वितरण लाइनें भी टूटी हुई पाई गईं, जिसके कारण दूषित पानी घरों तक पहुंच रहा था।
इस बीच, IMC कमिश्नर दिलीप यादव ने द हिंदू को बताया कि निवासियों की इमरजेंसी ज़रूरतों के लिए इलाके में 100 पानी के टैंकर भेजे गए हैं।
विजयवर्गीय के माफी मांगने के बाद स्थिति शांत
इस घटना के बाद, मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय एक पत्रकार के सवाल के जवाब में “फालतू सवाल मत पूछो” कहकर विवादों में घिर गए। पत्रकार ने पूछा था कि स्थानीय निवासियों को सरकार ने सार्वजनिक रूप से वादा करने के बावजूद अभी तक मुआवज़ा क्यों नहीं दिया है? जब यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो विजयवर्गीय के कथित बुरे बर्ताव के लिए नेटिज़न्स ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। हालांकि, विजयवर्गीय के X पर माफी मांगने के बाद स्थिति शांत हो गई।