नई दिल्ली। भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि अमेरिका और इज़राइल बातचीत को लेकर गंभीर नहीं हैं। उन्होने जोर देते हुए कहा कि ईरान ने यह युद्ध शुरू नहीं किया और वह इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता की तलाश जारी रखे हुए है। ईरान अपने क्षेत्र में कोई भी संकट या संघर्ष नहीं चाहता है। ईरान का मानना है कि इस क्षेत्र में युद्ध के कारण दुनिया के अधिकांश देश पीड़ित हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है होर्मुज़ जलडमरूमध्य का बंद होना। यह युद्ध बहुत से निर्दोष लोगों को नुकसान पहुंच रहा है और वे गैस, तेल और कुछ अन्य वस्तुओं की कीमतों से परेशान हैं। उन्होंने आगे कहा कि ईरान शांति, न्याय और मानवता के प्रति प्रतिबद्ध है और आगे तनाव बढ़ने से रोकने के लिए वैश्विक सहयोग का आह्वान किया। हम शांति, न्याय और मानवता की तलाश में हैं। हमें उम्मीद है कि दुनिया के सभी नेता एक साथ आएंगे, अपनी आवाज़ें मिलाएंगे और इस युद्ध को रोकेंगे।
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अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने आरोप लगाया कि एक देश के तौर पर इज़राइल का स्वभाव ही ऐसा है कि वह कभी भी अपनी कोई प्रतिबद्धता पूरी नहीं करता, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि अगर अमेरिका बातचीत जारी रखना चाहता है, तो वह ऐसा कर सकता है, लेकिन अमेरिका पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। इज़राइल कभी कोई प्रतिबद्धता पूरी नहीं करता और उस पर अमेरिका के नियंत्रण है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को ईरान पर निशाना साधते हुए कहा कि वह शांति समझौते के लिए बातचीत में होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अपने रणनीतिक नियंत्रण का इस्तेमाल एक सौदेबाजी के हथियार के तौर पर कर रहा है। उन्होंने कहा कि तेहरान के पास इस महत्वपूर्ण जलमार्ग के अलावा अपने हाथों में कोई पत्ते नहीं हैं। ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रम्प ने जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले जहाज़ों पर ट्रांज़िट शुल्क लगाने के तेहरान के प्रस्ताव की आलोचना की और कहा कि एकमात्र कारण जिसके चलते अमेरिका ने इस इस्लामी गणराज्य को पूरी तरह से नष्ट नहीं किया है और वह बातचीत करना है। ईरानियों को शायद यह एहसास नहीं है कि उनके पास अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों का इस्तेमाल करके दुनिया से अल्पकालिक तौर पर ज़बरन वसूली करने के अलावा कोई और पत्ता नहीं है। आज वे सिर्फ इसलिए ज़िंदा हैं ताकि बातचीत हो सके।