नई दिल्ली। हैदराबाद की प्रतिष्ठित नालसार (NALSAR) लॉ यूनिवर्सिटी विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ‘सूर्यकांत’ ने इस मामले में ‘बार काउंसिल ऑफ इंडिया’ द्वारा छात्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर सख्त नाराजगी जाहिर की। सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण विरोध करने का पूरा संवैधानिक अधिकार है और इसमें किसी भी बाहरी संस्था का दखल सहन नहीं किया जाएगा।
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‘छात्रों के खिलाफ नहीं होगी कोई दंडात्मक कार्रवाई’
इस अहम मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने अपने शब्दों में टिप्पणी की कि “यह मेरे और छात्रों के बीच का मामला है। इसमें बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) जैसी बाहरी संस्थाएं बीच में आने वाली कौन होती हैं?” इसके अलावा अदालत ने छात्रों और फैकल्टी की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए आदेश दिया कि इस विरोध प्रदर्शन को लेकर विश्वविद्यालय के किसी भी छात्र या प्रोफेसर के खिलाफ कोई भी दंडात्मक या सुधारात्मक कार्रवाई (Punitive Action) नहीं की जाएगी। इसके साथ ही कोर्ट ने इस पूरे विवाद पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया से जवाब भी तलब किया है।
क्या है पूरा विवाद?
आपको बता दें कि इस विवाद की शुरुआत नालसार (NALSAR) यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह (Convocation) से हुई, जहां चीफ जस्टिस सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया गया था। वहां यूनिवर्सिटी के करीब 450 छात्रों ने इस आमंत्रण का शांतिपूर्ण विरोध किया। आपको बता दें कि छात्रों के विरोध की मुख्य वजह दिल्ली में NEET प्रदर्शनकारियों पर हुई कथित पुलिस बर्बरता का मामला था। इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने वीडियो साक्ष्य देखने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि “अदालत का समय बर्बाद न करें”। शीर्ष अदालत की इस टिप्पणी से छात्र आहत थे और इसी के विरोध में उन्होंने दीक्षांत समारोह का बहिष्कार करने का निर्णय लिया था।
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BCI के आदेश पर मचा था देशव्यापी बवाल
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने छात्रों के इस विरोध से नाराज होकर एक विवादित परिपत्र जारी कर दिया था। इस आदेश में देश की सभी स्टेट बार काउंसिलों को नालसार यूनिवर्सिटी के साल 2026 बैच के छात्रों का बतौर वकील नामांकन (Enrolment) रोकने के लिए निर्देश दिया गया था। BCI के इस कदम की चारों तरफ आलोचना हुई। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA), कानूनी दिग्गजों और कई राजनेताओं ने इसे छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ और अभिव्यक्ति की आजादी को दबाने वाला कदम बताया। वहीं छात्र संगठनों की ओर से देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी के बाद, BCI को बैकफुट पर आना पड़ा और उन्होंने “जल्दबाजी में लिया गया फैसला” बताते हुए कुछ ही घंटों में अपना यह आदेश वापस ले लिया था।
कोर्ट ने दिया छात्रों को संरक्षण
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किसी भी कीमत पर नहीं होने दिया जाएगा। अदालत के इस कड़े रुख के बाद नालसार यूनिवर्सिटी के साल 2026 बैच के छात्रों को बड़ी राहत मिली है और उनके वकालत के रजिस्ट्रेशन का रास्ता पूरी तरह खुल गया है।