संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा जारी किए गए एक नए विश्व मानचित्र को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। इस नक्शे में भारत के संप्रभु क्षेत्रों जैसे अक्साई चिन और अरुणाचल प्रदेश को त्रुटिपूर्ण ढंग से दर्शाया गया है। इसके साथ ही, पूर्वोत्तर भारत के दो राज्यों, असम और नगालैंड, के बीच की राज्य सीमा को भी इस मानचित्र से पूरी तरह हटा दिया गया है। भारत ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक स्तर पर नक्शों को सुव्यवस्थित करने से जुड़े 'करेक्ट द मैप' (Correct the Map) प्रस्ताव का समर्थन किया है। इसी समय में यह विवाद सामने आया है।
नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा जारी किए गए एक नए विश्व मानचित्र को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। इस नक्शे में भारत के संप्रभु क्षेत्रों जैसे अक्साई चिन और अरुणाचल प्रदेश को त्रुटिपूर्ण ढंग से दर्शाया गया है। इसके साथ ही, पूर्वोत्तर भारत के दो राज्यों, असम और नगालैंड, के बीच की राज्य सीमा को भी इस मानचित्र से पूरी तरह हटा दिया गया है। भारत ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक स्तर पर नक्शों को सुव्यवस्थित करने से जुड़े ‘करेक्ट द मैप’ (Correct the Map) प्रस्ताव का समर्थन किया है। इसी समय में यह विवाद सामने आया है।
नक्शे में क्या हैं गंभीर त्रुटियां?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के इस नए मानचित्र में भारत की सीमाओं के साथ कुछ मुख्य छेड़छाड़ देखी गई है जिसमें अरुणाचल प्रदेश की उत्तरी सीमा को “भारतीय रेखा” के रूप में दिखाया गया है, लेकिन उसकी दक्षिणी सीमा को “चीनी रेखा” के रूप में चिह्नित किया गया है। इसके अलावा, अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड के बीच की सीमा को मानचित्र से हटा दिया गया है। साथ ही अक्साई चिन क्षेत्र में पूर्वी सीमा को “भारतीय रेखा” और पश्चिमी सीमा को “चीनी रेखा” दर्शाया गया है। इस प्रकार, भारत के इस अभिन्न हिस्से को दो विरोधी दावों के बीच का क्षेत्र बना दिया गया है। इसमें ध्यान देनेवाली बात यह है कि 2011 में जारी संयुक्त राष्ट्र के पिछले नक्शे में इन रेखाओं को स्पष्ट रूप से “दावा रेखा” (Claim Lines) लिखा गया था। लेकिन 2026 के इस नए संस्करण में इसको हटा दिया गया है, जिससे भ्रम की स्थिति और गंभीर हो गई है। वहीं कश्मीर क्षेत्र में नियंत्रण रेखा (LoC) को बिंदुवार लाइन से दिखाया गया है और साथ में एक फुटनोट जोड़ा गया है, जिसमें कहा गया है कि इस क्षेत्र की अंतिम स्थिति पर अभी भारत और पाकिस्तान के बीच समझौता होना बाकी है।
‘करेक्ट द मैप’ प्रस्ताव और भारत का रुख
आपको बता दें कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र के ‘करेक्ट द मैप’ प्रस्ताव का समर्थन इस स्पष्ट समझ के साथ किया था कि इसका उद्देश्य तकनीकी रूप से मानचित्रों को दुरुस्त करना है। हालांकि, भारतीय राजनयिकों ने पहले ही यह साफ कर दिया था कि इस प्रस्ताव के समर्थन का अर्थ यह बिल्कुल ही नहीं है कि भारत अपनी संप्रभु सीमाओं के किसी भी गलत या भ्रामक चित्रण को स्वीकार करेगा।
रणनीतिक चिंताएं
वहीं भू-राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र के नक्शे में इस तरह की विसंगतियां भारत की क्षेत्रीय अखंडता के लिहाज से बेहद चिंताजनक हैं। भारत सरकार का हमेशा से यह कड़ा रुख रहा है कि पूरा जम्मू-कश्मीर, लद्दाख जिसमें अक्साई चिन शामिल है, और अरुणाचल प्रदेश भारत के अटूट और अविभाज्य हिस्से हैं। विदेश मंत्रालय द्वारा इस मामले को संयुक्त राष्ट्र के समक्ष आधिकारिक रूप से उठाए जाने की संभावना है।