मुंबई। महाराष्ट्र सरकार (Government of Maharashtra) के मंत्री और एनसीपी (अजित पवार गुट) के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल (Chhagan Bhujbal) ने रविवार को बताया कि पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) से मुलाकात कर वित्त विभाग (Finance Department) की मांग की है। हालांकि, उन्होंने राज्य में मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलों को खारिज कर दिया। जब उनसे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP ) के दोनों गुटों के विलय की अटकलों के बारे में पूछा गया, तो भुजबल ने पत्रकारों से कहा कि यह मामला अब बंद हो चुका अध्याय है। बता दें कि एनसीपी नेता और तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजीत पवार (जिनका इस साल जनवरी में एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया था) के पास भाजपा (BJP) के नेतृत्व वाली महायुति सरकार में वित्त विभाग था। फिलहाल वित्त विभाग मुख्यमंत्री फडणवीस के पास है।
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एनसीपी ने मुख्यमंत्री से क्या मांग की?
एनसीपी (NCP ) के प्रतिनिधिमंडल में उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और पार्टी के वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे (Sunil Tatkare) , प्रफुल्ल पटेल (Praful Patel) तथा छगन भुजबल (Chhagan Bhujbal) शामिल थे। उन्होंने रविवार को सीएम फडणवीस से मुलाकात कर पार्टी के लिए वित्त विभाग आवंटित करने की मांग की। इस मांग के बारे में पूछे जाने पर कि क्या फडणवीस ने कोई आश्वासन दिया है या कोई समय-सीमा तय की है, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री भुजबल ने कहा कि कोई निश्चित तारीख नहीं दी जा सकती। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री उनकी पार्टी की मांग को लेकर सकारात्मक थे। वहीं, एनसीपी (NCP) द्वारा वित्त विभाग के विकल्प के तौर पर कोई और व्यवस्था स्वीकार करने के सवाल पर उन्होंने जोर देकर कहा, हमें सिर्फ वित्त विभाग ही चाहिए।
मंत्रिमंडल में फेरबदल पर क्या बोले भुजबल?
मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए भुजबल ने कहा, ‘मंत्रियों को बदलने को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है।’ उन्होंने आगे कहा कि मंत्रिमंडल में फेरबदल करना पूरी तरह से मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। अपनी पार्टी और शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (शरद पवार) के विलय की अटकलों पर भुजबल ने कहा कि यह मामला अब बंद हो चुका है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, ‘आप लोग बहस शुरू करते हैं और हमें जवाब देना पड़ता है।’ बता दें कि एनसीपी (शरद पवार) विपक्षी ‘महा विकास अघाड़ी’ का हिस्सा है, जिसमें उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) और कांग्रेस भी शामिल हैं। पिछले महीने, शरद पवार ने भी कहा था कि उनकी पार्टी सत्ता के लिए किसी अन्य संगठन में विलय नहीं करेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब पूरा ध्यान संगठन को मजबूत करने पर होगा।