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माघी पूर्णिमा स्नान के लिए ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य को मनाने में जुटे अफसर, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने रखी ये शर्तें

By संतोष सिंह 
Updated Date

वाराणसी। ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य (Shankaracharya of Jyotish Peeth) स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज (Swami Avimukteshwaranand Saraswati Maharaj) माघी पूर्णिमा (Maghi Purnima) पर संगम में डुबकी लगा सकते हैं। लखनऊ के कुछ उच्चाधिकारियों ने शंकराचार्य से संपर्क कर उन्हें मनाने की कोशिश शुरू कर दी है। अधिकारी शंकराचार्य से माघी पूर्णिमा (Maghi Purnima) पर संगम में स्नान के लिए आग्रह कर रहे हैं।

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इसी बीच शंकराचार्य ने स्नान करने के लिए कई शर्तें भी अधिकारियों के सामने रख दी हैं। जिसमें मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya) को अभद्रता करने वाले अधिकारी लिखित में माफी मांगें, बटुकों, ब्राह्मणों, साधु-संतों और वृद्धों की पिटाई करने वाले पुलिस कर्मियों और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई के साथ एफआईआर हो और चारों शंकराचार्यों के स्नान के लिए प्रोटोकॉल बने समेत ये चार मांग की हैं। यह सभी चार मांगें मानने पर ही शंकराचार्य ने स्नान की बात कही है। इसकी पुष्टि शंकराचार्य के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी (National Media In-charge) शैलेंद्र योगीराज सरकार (Shailendra Yogiraj Sarkar) ने की है।

बता दें कि 28 जनवरी (बुधवार) को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने माघ मेला परिसर छोड़ दिया था। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा था कि वे आस्था और श्रद्धा के साथ माघ मेला में आए थे, लेकिन परिस्थितियां ऐसी बन गईं कि बिना स्नान किए ही लौटना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि एक ऐसी घटना घटी, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी, जिससे उनका मन व्यथित हो गया। प्रयागराज हमेशा से शांति, विश्वास और सनातन परंपराओं की भूमि रही है और यहां से इस तरह लौटना उनके लिए बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि माघ मेला में स्नान करना उनके लिए आस्था का विषय था। लेकिन इसके बाद भी मौजूदा हालात में उन्होंने मेला छोड़ने का कठिन निर्णय लिया है।

मौनी अमावस्या से शुरू हुआ था विवाद

गौरतलब है कि बीते दिनों मौनी अमावस्या (Maghi Purnima)  के अवसर पर संगम पर स्नानार्थियों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। श्रद्धालु बड़ी संख्या में डुबकी लगाने के लिए पहुंचे थे। जिसके कारण संगम पर गहमागहमी की स्थिति हो गई थी। इसी बीच ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Swami Avimukteshwaranand Saraswati)  भी संगम पहुंचे थे, लेकिन भीड़ ज्यादा होने की वजह से प्रशासन ने उन्हें रोक दिया था। प्रशासन ने उनसे रथ से उतरकर पैदल जाने का आग्रह किया था। इस पर उनके भक्तों और पुलिस के बीच विवाद शुरू हो गया था। शंकराचार्य ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने संतों के साथ मारपीट की है। उन्होंने कहा है कि जब प्रशासन ने हमें रोका तो हम सहयोग के लिए तैयार थे। जब हम वापस जाने लगे तो पुलिस ने संतों और भक्तों से मारपीट शुरू कर दी थी।

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