Advertisement
  1. हिन्दी समाचार
  2. टेलीविजन
  3. गजल के ‘बेताज बादशाह’ पंकज उधास दुनिया को ​कर गए उदास, भारत-चीन युद्ध के दौरान गाया था ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’

गजल के ‘बेताज बादशाह’ पंकज उधास दुनिया को ​कर गए उदास, भारत-चीन युद्ध के दौरान गाया था ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’

By santosh singh 
Updated Date

नई दिल्ली। बॉलीवुड इंडस्ट्री (Bollywood Industry) के मशहूर गजल गायक पंकज उधास (Famous Ghazal singer Pankaj Udhas) का सोमवार को लंबी बीमारी के बाद 72 साल की उम्र में निधन हो गया है। उनके निधन की खबर से मनोजरंन इंडस्ट्री (Manojaran Industries) में हर कोई उदास है।

पढ़ें :- पीएम मोदी संसद में बयान दें, न कि रात में वीडियो रिकॉर्ड कर एकतरफा मन की बात करें : मल्लिकार्जुन खरगे

मशहूर गजल गायक पंकज उधास (Famous Ghazal singer Pankaj Udhas) का पूरा पंकज उधास चारण है। इनका जन्म गुजरात में राजकोट के पास चारखड़ी-जैतपुर में एक ज़मींदार चारण परिवार में (17 मई 1951) हो हुआ था। वे तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। उनके पिता का नाम केशूभाई उधास और मां का नाम जीतूबेन उधास है। उनके सबसे बड़े भाई मनहर उधास ने बॉलीवुड में हिंदी पार्श्व गायक के रूप में सफलता प्राप्त की थी। उनके दूसरे बड़े भाई निर्मल उधास भी एक प्रसिद्ध गज़ल गायक हैं और तीनों भाइयों में से सबसे पहले गायिकी का काम उन्होंने ही शुरू किया था। उन्होंने सर बीपीटीआई भावनगर से शिक्षा प्राप्त की थी। उसके बाद उनका परिवार मुम्बई आ गया और पंकज ने वहां के सेंट जेवियर्स कॉलेज में पढ़ाई की।

पंकज उधास के दादाजी गांव से पहले स्नातक और भावनगर राज्य के दीवान (राजस्व मंत्री) थे। उनके पिता, केशुभाई उधास, एक सरकारी कर्मचारी थे और प्रसिद्ध वीणा वादक अब्दुल करीम खान से मिले थे, जिन्होंने उन्हें दिलरुबा वादन सिखाया था।

पंकज उधास ने बचपन में अपने पिता को दिलरुबा वाद्य बजाते देखते थे। संगीत में उनकी और उनके भाइयों की रुचि को देखते हुए उनके पिता ने उन्हें राजकोट में संगीत अकादमी में दाखिला दिलाया। उधास ने शुरू में तबला सीखने के लिए खुद को नामांकित किया, लेकिन बाद में गुलाम कादिर खान साहब से हिंदुस्तानी मुखर शास्त्रीय संगीत सीखना शुरू किया। इसके बाद उधास ग्वालियर घराने के गायक नवरंग नागपुरकर के संरक्षण में प्रशिक्षण लेने के लिए मुंबई चले गए।

भारतीय संगीत उद्योग में उनको तलत अजीज़ और जगजीत सिंह जैसे अन्य संगीतकारों के साथ इस शैली को लोकप्रिय संगीत के दायरे में लाने का श्रेय दिया जाता था। उधास को फिल्म नाम में गायकी से प्रसिद्धि मिली, जिसमें उनका एक गीत चिठ्ठी आई है काफी लोकप्रिय हुआ था। उसके बाद से उन्होंने कई फिल्मों के लिए एक पार्श्व गायक के रूप में अपनी आवाज दी है। इसके अतिरिक्त उन्होंने कई एल्बम भी रिकॉर्ड किये हैं और एक कुशल गज़ल गायक के रूप में पूरी दुनिया में अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। 2006 में पंकज उधास को पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

पढ़ें :- CJP-Government Talks : आज सीजेपी और सरकार के बीच दूसरी बार होगी बातचीत, वांगचुक ने देर रात तोड़ा अपना अनशन

पंकज उधास ऐसे चढ़े सफलता की सीढ़ियां

पंकज उधास के बड़े भाई मनहर रंगमंच के एक अभिनेता थे, जिसकी वजह से पंकज संगीत के संपर्क में आये। रंगमंच पर उनका पहला प्रदर्शन भारत-चीन युद्ध के दौरान हुआ जिसमें उन्होंने “ऐ मेरे वतन के लोगों” गाया जिसके लिए एक दर्शक द्वारा उनको पुरस्कार स्वरूप 51 रुपये का इनाम भी दिया गया।

चार साल बाद वे राजकोट की संगीत नाट्य अकादमी में भर्ती हो गए और तबला बजाने की बारीकियों को सीखा। उसके बाद, उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज से विज्ञान स्नातक डिग्री की पढ़ाई की और एक ‘बार’ में काम शुरू कर दिया, तथा समय निकालकर गायन का अभ्यास करते रहे। उधास ने पहली बार 1972 की फिल्म कामना में अपनी आवाज दी जो कि एक असफल फिल्म रही थी।

इसके बाद, उधास ने ग़ज़ल गायन में रुचि विकसित की और ग़ज़ल गायक के रूप में अपना करियर बनाने के लिए उन्होंने उर्दू भी सीखी। सफलता न मिलने के बाद वे कनाडा चले गए और वहां तथा अमेरिका में छोटे-मोटे कार्यक्रमों में ग़ज़ल गायिकी करके अपना समय बिताने के बाद वे भारत आ गए। उनका पहली ग़ज़ल एल्बम आहट 1980 में रिलीज़ हुआ था। यहां से उन्हें सफलता मिलनी शुरू हो गयी और 2009 तक वे 40 एल्बम रिलीज़ कर चुके हैं।

1986 में उधास को नाम फिल्म में अपनी कला का प्रदर्शन करने का एक और अवसर प्राप्त हुआ जिससे उनको काफी प्रसिद्धि भी मिली। वे पार्श्व गायक के रूप में काम जारी रखा, वे साजन, ये दिल्लगी और फिर तेरी कहानी याद आई जैसी कुछ फिल्मों में भी दिखाई दिए।

पढ़ें :- सोनिया गांधी का केंद्र पर बड़ा हमला, कहा-जवाबदेही और शिक्षा सुधार की मांग करने वाले छात्रों को देश का दुश्मन मान रही है मोदी सरकार

बाद में उधास ने सोनी एंटरटेंमेंट टेलीविजन पर ‘आदाब अर्ज है ‘ नाम से एक टेलेंट हंट कार्यक्रम की शुरुआत की। अभिनेता जॉन अब्राहम उधास को अपना मेंटर कहते थे।

गजल के ‘बेताज बादशाह’ पंकज उधास ने लगा दी थी पुरस्कारों की  झड़ी

2006 – पंकज उधास को ग़ज़ल गायकी के करियर में सिल्वर जुबली पूरा करने के उपलक्ष्य में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

2006 – “2005 के सर्वश्रेष्ठ गज़ल एल्बम” के रूप में “हसरत” को कोलकाता में प्रतिष्ठित “कलाकार” एवार्ड से सम्मानित किया गया।

2004 – लंदन के वेम्बली कॉन्फरेंस सेंटर में इस प्रतिष्ठित स्थान पर प्रदर्शन के 20 साल पूरे करने के लिए विशेष सम्मान.

2003 – ‘इन सर्च ऑफ मीर’ नामक सफल एल्बम के लिए एमटीवी इम्मीज एवार्ड दिया गया।

पढ़ें :- सोनम वांगचुक ने अनशन तोड़ने के बाद जारी किया वीडियो संदेश, सरकार ने दिया तीन लिखित आश्वासन, मानी ये मांगें

2003 – गज़ल को पूरे विश्व में लोकप्रिय बनाने के लिए न्यूयॉर्क के बॉलीवुड म्यूज़िक एवार्ड में स्पेशल अचीवमेंट एवार्ड से सम्मानित किया गया।

2003 – गज़ल और संगीत उद्योग में योगदान के लिए दादाभाई नौरोजी इंटरनेशनल सोसायटी द्वारा दादाभाई नौरोजी मिलेनियम एवार्ड से सम्मानित किया गया।

2002 – मुंबई में सहयोग फाउंडेशन द्वारा संगीत क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए पुरस्कृत किया गया।

2002 – इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा सम्मानित किया गया।

2001 – मुंबई शहर के रोटरी क्लब द्वारा एक गज़ल गायक के रूप में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए वोकेशनल रिकग्नीशन अवार्ड.

1999 – भारतीय संगीत में असाधारण सेवाओं के लिए, विशेष रूप से भारत और विदेशों में ग़ज़ल को बढ़ावा देने के लिए भारतीय विद्या भवन, अमेरिका पुरस्कार. न्यूयॉर्क में आयोजित गजल समारोह में प्रदान किया गया।

1998 – जर्सी सिटी के मेयर द्वारा इंडियन आर्ट्स एवार्ड्स गाला से सम्मानित किया गया।

पढ़ें :- गांधी स्मृति पहुंचे विपक्ष के सांसद: राहुल गांधी बोले-भारत के छात्रों के साथ खड़े होने से हमें कोई नहीं रोक सकता

1998 – अटलांटिक सिटी में अमेरिकन एकेडमी ऑफ आर्टिस्ट्स द्वारा आउटस्टैंडिंग आर्टिस्ट्स अचीवमेंट एवार्ड से सम्मानित किया गया।

1996 – संगीत क्षेत्र में बेहतरीन सेवा, उपलब्धि और योगदान के लिए इंदिरा गांधी प्रियदर्शनी एवार्ड से सम्मानित किया गया।

1994 – संयुक्त राज्य अमेरिका के ल्यूबोक टेक्सास की मानद नागरिकता.

1994 – रेडियो के ऑफिशियल हिट परेड के कई मुख्य गानों की बेहतरीन सफलता के लिए रेडियो लोटस एवार्ड से सम्मानित किया गया। डर्बन यूनिवर्सिट में रेडियो लोटस, साउथ अफ्रीका द्वारा प्रदान किया गया।

1993 – संगीत के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ मानकों को प्राप्त करने के लिए असाधारण प्रयासों को करने और इस प्रकार पूरे समुदाय को उत्कृष्टता प्राप्ति हेतु प्रोत्साहित करने के लिए जायंट्स इंटरनेशनल अवार्ड.

1990 – सकारात्मक नेतृत्व और राष्ट्र के प्रति की गई बेहतरीन सेवा के लिए आउटस्टैंडिंग यंग पर्सन्स एवार्ड (1989-90) से सम्मानित किया गया। इंडियन जूनियर चैम्बर्स द्वारा प्रदान किया गया।

1985 – वर्ष का सर्वश्रेष्ठ गज़ल गायक होने के लिए के एल सहगल एवार्ड से सम्मानित किया गया।

Advertisement