लंदनः ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक (British Prime Minister Rishi Sunak) ने ब्रिटिश पार्लियामेंट (British Parliament) को भंग कर दिया है। इसके साथ ही आधी रात से ब्रिटेन पार्लियामेंट (British Parliament) में 650 संसद सदस्यों की सीटें एक झटके में खाली हो गई हैं। हालांकि ब्रिटेन की मौजूदा कंजर्वेटिव पार्टी (Conservative Party) की सरकार का कार्यकाल दिसंबर में पूरा होना है। ब्रिटेन के नियमों के मुताबिक यहां 28 जनवरी 2025 से पहले और 17 दिसंबर के बाद चुनाव कराया जाना था। मगर पीएम ऋषि सुनक (PM Rishi Sunak) ने 6 महीने पहले ही अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए संसद को भंग कर दिया है। ऐसे में अब 4 जुलाई को ब्रिटेन में चुनाव कराए जाएंगे।
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अब 4 जुलाई के आम चुनाव से पहले ब्रिटिश संसद (British Parliament) भंग होने के बाद करीब 5 हफ्ते का वक्त चुनाव प्रचार के लिए बचा है। सत्तारूढ़ कंजर्वेटिव पार्टी (Conservative Party) के 14 साल के शासन के बाद इस बार विभिन्न सर्वे में लेबर पार्टी (Labour Party) के सत्ता में आने की संभावना दिख रही है। चुनावी कार्यक्रम के अनुरूप आधी रात होते ही एक मिनट बाद संसद सदस्यों (सांसदों) की 650 सीटें खाली हो गईं। इसके साथ ही पांच सप्ताह का चुनावी प्रचार भी आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया।
पीएम ऋषि सुनक के लिए बारिश को बताया अपशकुन
प्रधानमंत्री ऋषि सुनक (Prime Minister Rishi Sunak) की बारिश के दौरान यह चुनावी घोषणा की। ऐसे में पहले सप्ताह चुनाव प्रचार की शुरुआत धीमी रही। इसलिए कई पर्यवेक्षकों ने बारिश को उनके लिए एक अपशकुन के रूप में पेश किया। हालांकि ऋषि सुनक (Rishi Sunak)के पहले के ऐलान से ही ऐसा पूर्व अपेक्षित था कि वह 4 जुलाई से पहले कभी भी संसद को भंग कर सकते हैं। क्योंकि पीएम सुनक ने वर्ष के अंत में चुनाव कराने के बजाय 4 जुलाई का वक्त निर्धारित किया। इसके बाद पर्यवेक्षकों ने कहा कि जनमत सर्वेक्षणों में उनकी पार्टी के पिछड़ने के कारण फिर से गति हासिल करने का यह एक प्रयास है।
ब्रिटेन में लेबर पार्टी जीती तो ये हो सकते हैं पीएम
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अगर सर्वेक्षणों के मुताबिक इस बार लेबर पार्टी (Labour Party) सत्ता में आती है तो पूर्व मानवाधिकार वकील और विपक्ष के कद्दावर नेता कीर स्टारमर ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री हो सकते हैं। लेबर पार्टी (Labour Party) के पास अब 14 वर्षों तक विपक्ष में रहने के बाद दोबारा सत्ता हासिल करने का मौका है। चुनावी सर्वेक्षणों में सत्ताधारी कंजर्वेटिव लेबर पार्टी (Labour Party) से दोहरे अंकों में पिछड़ते दिख रहे हैं। इस वजह से सत्ताधारी पार्टी के सांसदों ने बड़े पैमाने पर पलायन किया यानि पार्टी छोड़ दी। वहीं कुछ कंजर्वेटिव सांसदों ने जीत की धूमिल संभावनाओं के सामने हार मान ली। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अब तक लगभग 129 सांसदों ने घोषणा की है कि वे दोबारा चुनाव नहीं लड़ेंगे। इनमें से 77 सांसद सत्ताधारी कंजर्वेटिव पार्टी (Conservative Party) के हैं।