Seating Controversy: देश आज 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया और आजादी के जश्न में शामिल हुए। लेकिन इस राष्ट्रीय समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी नजर नहीं आए। लगातार दूसरे साल दोनों नेताओं के कार्यक्रम में शामिल नहीं होने को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है।
पढ़ें :- Independence Day special: 1947 से आज तक नहीं उतरा तिरंगा, इस गांव में 80 साल से लगातार लहरा रहा तिरंगा
राहुल-खरगे की नाराजगी का कारण
दरअसल कांग्रेस नेताओं के समारोह से दूरी बनाने के पीछे मुख्य वजह बैठने की व्यवस्था को माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस इस बात से नाराज है कि लाल किले के समारोह में विपक्ष के नेताओं के साथ प्रोटोकॉल के अनुरूप व्यवहार नहीं किया गया। विवाद की शुरुआत साल 2024 में हुई थी। उस दौरान राहुल गांधी लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह में पीछे की कतार में बैठे नजर आए थे। कांग्रेस ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे लोकसभा में विपक्ष के नेता के पद और संवैधानिक प्रोटोकॉल के अनुरूप नहीं बताया था।
रक्षा मंत्रालय की सफाई के बावजूद नहीं थमी कांग्रेस की नाराजगी
वहीं रक्षा मंत्रालय की ओर से उस समय सफाई दी गई थी कि ओलंपिक खिलाड़ियों के लिए जगह बनाने के कारण बैठने की व्यवस्था में बदलाव किया गया था। हालांकि, इस मुद्दे पर कांग्रेस की नाराजगी खत्म नहीं हुई। अब लगातार दूसरे साल राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के समारोह में नहीं पहुंचने से सरकार और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक दूरी एक बार फिर चर्चा में है।
पढ़ें :- Independence Day 2026: आजादी के जश्न में डूबा बॉलीवुड, सितारों ने ऐसे दी देशवासियों को शुभकामनाएं
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब हाल ही में संसद का मानसून सत्र भी खत्म हुआ है। इस दौरान सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी तकरार देखने को मिली। सत्र के दौरान कुल 12 विधेयक पारित हुए और कामकाज को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए। सत्र समाप्त होने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से आयोजित पारंपरिक चाय कार्यक्रम का भी कांग्रेस समेत कुछ विपक्षी दलों ने बहिष्कार किया।ऐसे में लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह से राहुल गांधी और खरगे की गैरमौजूदगी को सिर्फ एक कार्यक्रम से दूरी नहीं, बल्कि सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते राजनीतिक मतभेदों के एक और संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि स्वतंत्रता दिवस पूरे देश का राष्ट्रीय पर्व है और इस मौके पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर देश की एकता और लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने का संदेश दिया जाता है।