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मोदी सरकार Gen Z से डरती है, इसी घबराहट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार युवाओं का वोट‍िंग अध‍िकार को छीनने में लगे हुए हैं: कांग्रेस

चुनाव आयोग (Election Commission) में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (ECs) के बीच मतदाता सूची के वार्षिक पुनरीक्षण (SSR)  को लेकर मतभेद का असर अब नए मतदाताओं पर पड़ता दिखाई दे रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले Gen Z यानी युवा मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया में देरी हो रही है।

By santosh singh 
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नई दिल्ली। चुनाव आयोग (Election Commission) में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (ECs) के बीच मतदाता सूची के वार्षिक पुनरीक्षण (SSR)  को लेकर मतभेद का असर अब नए मतदाताओं पर पड़ता दिखाई दे रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले Gen Z यानी युवा मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया में देरी हो रही है।

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इसको लेकर कांग्रेस पार्टी ने मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोला है। कहा कि सरकार Gen Z से डरती है, क्योंकि वो मोदी के खिलाफ खड़ा है। इसी घबराहट में मोदी ने ज्ञानेश कुमार के साथ मिलकर एक साजिश रची है। अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार Gen Z के वोट‍िंग अध‍िकार को छीनने में लगे हुए हैं। चुनाव आयोग हर साल Special Summary Revision (SSR) करता है, ताक‍ि नए 18 साल के युवाओं को वोटर लिस्ट में जोड़ा जाए, लेक‍िन ज्ञानेश कुमार ने 2024 से SSR पर रोक लगा दी है। मतलब अब 18 साल के युवाओं को वोटर ल‍िस्‍ट में जोड़ने का काम ठप पड़ा है।

जबक‍ि दोनों चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी SSR को शुरू करने की मांग कर रहे हैं, लेक‍िन ज्ञानेश कुमार इसे नहीं होने दे रहे हैं। उदाहरण Example के तौर पर यूपी और गोवा में अगले साल चुनाव होने वाले हैं, लेक‍िन यहां SSR नहीं क‍िया गया। इसकी वजह से 18 साल के नए युवा वोटर ल‍िस्‍ट में जुड़ नहीं पाए

ब‍िहार में SIR की प्रक‍िया के बाद एक साल हो चुका है। उसके बाद से 18 साल के नए वोटर को जोड़ने का काम नहीं हुआ। साफ है कि ज्ञानेश और मोदी ने देश के लोकतंत्र को बहुत नुकसान पहुंचाया है। लेकिन याद रहे कि Gen Z आपके अपराध नोट कर रहा है सबक सिखाएगा। जनरेशन-जी के वोटिंग अधिकार पर संकट, जनवरी 2024 से अटका विशेष मतदाता पुनरीक्षण।

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रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2024 में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की शुरुआत के बाद से वार्षिक विशेष सारांश पुनरीक्षण (SSR) की प्रक्रिया कई राज्यों में आगे नहीं बढ़ सकी है। 2025-26 में भी नियमित SSR नहीं कराया गया, जबकि चुनाव आयोग के दो आयुक्तों ने इसे दोबारा शुरू करने की जरूरत पर जोर दिया।

CEC और ECs के बीच मतभेद का असर

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों के बीच इस मुद्दे पर मतभेद के चलते SSR की प्रक्रिया प्रभावित हुई। आयोग को इस संबंध में कानूनी राय लेने की जरूरत भी पड़ी। इसके बाद दोनों चुनाव आयुक्तों ने कथित तौर पर SSR को फिर से शुरू करने और नए 18 वर्षीय मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

हर साल चार मौकों पर जुड़ सकते हैं नए मतदाता

मतदाता सूची में 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं को शामिल करने के लिए साल में चार कट-ऑफ तारीखें निर्धारित हैं—1 जनवरी, 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर। इससे साल के अलग-अलग समय में 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं को मतदाता सूची में शामिल किया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2026-27 के लिए भी बड़ी संख्या में पात्र 18 वर्षीय मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

50 अधिकारियों के ACR पर भी असर

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रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2025-26 में स्थानांतरित किए गए करीब 50 चुनाव अधिकारियों के वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन (ACR) को लेकर प्रशासनिक समस्या सामने आई। इनमें CEO और डिप्टी EC स्तर के अधिकारी शामिल हैं। CEC और दोनों ECs के हस्ताक्षर की आवश्यकता के कारण कुछ ACR लंबित बताए गए हैं।

पूरी प्रक्रिया में देरी का दावा

SSR की सामान्य प्रक्रिया में राज्यों को पहले तैयारियां करने के बाद ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित करनी होती है। इसके बाद दावे और आपत्तियां आमंत्रित की जाती हैं और अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाती है। रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया में देरी का असर आगामी चुनावों की तैयारियों पर भी पड़ सकता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उत्तराखंड और पंजाब जैसे चुनावी राज्यों में मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया समय पर पूरी करना महत्वपूर्ण है। बिहार में भी मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर अलग से उल्लेख किया गया है।

 

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