देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) को लेकर एक मीडिया रिपोर्ट के बाद हंगामा मचा हुआ है। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) तक पहुंचने वाला है। देश की सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के एक वकील ने भारत के अटॉर्नी जनरल (Attorney General of India) से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar) के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मंजूरी मांगी है।
नई दिल्ली। देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) को लेकर एक मीडिया रिपोर्ट के बाद हंगामा मचा हुआ है। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) तक पहुंचने वाला है। देश की सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के एक वकील ने भारत के अटॉर्नी जनरल (Attorney General of India) से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar) के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मंजूरी मांगी है। वकील का आरोप है कि उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के कामकाज से जुड़े सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसलों की जानबूझकर अनदेखी की है।
वकील ब्रजेश सिंह ने 24 सितंबर को अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी को लिखे पत्र में कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट, 1971 की धारा 15(1)(b) और धारा 2(c) के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अवमानना कार्यवाही को तय करने वाले नियम, 1975 के नियम 3 का हवाला दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के किस आदेश का उल्लंघन?
वकील ब्रजेश सिंह का कहना है कि टीएन शेषन बनाम भारत सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का ज्ञानेश कुमार ने उल्लंघन किया है। फैसले के अनुसार चुनाव आयोग (Election Commission) को कई सदस्यों वाली संवैधानिक संस्था के तौर पर काम करना चाहिए और मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) का पद बराबर अधिकार वालों में सबसे आगे होता है न कि पूरी तरह से सर्वेसर्वा। टीएन शेषन मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा था कि CEC को संस्था से ज्यादा ताकतवर नहीं दिखाया जा सकता और कई सदस्यों वाले चुनाव आयोग के फैसले आयोग के फैसले होते हैं, न कि उसके चेयरमैन के।
‘यह सुप्रीम कोर्ट का अवमानना’
उन्होंने एक और केस का हवाला दिया है। अनूप बरनवाल बनाम भारत सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के 2023 के फैसले में चुनाव आयोग (Election Commission) से जुड़े संवैधानिक ढांचे पर बात की गई थी। स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए एक स्वतंत्र चुनाव आयोग (Election Commission) महत्व पर जोर दिया गया था। फैसले में चुनाव आयोग (Election Commission) को एक ऐसी संस्था बताया गया था जिसे निष्पक्ष, पारदर्शी और बिना किसी भेदभाव के चुनाव कराने का काम सौंपा गया है। वकील ब्रजेश सिंह आरोप लगाया गया है कि पूर्ण आयोग के नाम पर फैसले या सूचनाएं जारी करते समय अन्य चुनाव आयुक्तों को नजरअंदाज करना संविधान के अनुच्छेद 141 के तहत सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा घोषित कानून की जानबूझकर अवहेलना होगी।
आपको बता दें कि अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की एक रिपोर्ट में कहा गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू (Election Commissioner Sukhbir Singh Sandhu) और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर चुनाव आयोग द्वारा उनकी जानकारी या मंजूरी के बिना लिए गए फैसलों पर आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के अनुसार, ये आपत्तियां फॉर्म 6 में बदलाव, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने के साथ-साथ मतदाता सूची डेटाबेस तक पहुंच की सीमित करने से जुड़ी थीं।