सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर निशु आजाद और उनके पिता संजय आजाद हाल ही में दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट द्वारा धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले कथित आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में दिल्ली पुलिस से कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) तलब किए जाने के बाद चर्चा में हैं।
Social Media Post: नई दिल्ली में सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े एक मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। अदालत में दायर याचिका में संजय आजाद और उनकी नाबालिग बेटी निशु आजाद के खिलाफ FIR दर्ज करने का अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए कुछ पोस्ट में हिंदू देवी-देवताओं को लेकर आपत्तिजनक और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली सामग्री साझा की गई।
अधिवक्ता अमिता सचदेवा की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि इस संबंध में दिल्ली पुलिस से शिकायत की गई थी, लेकिन कथित तौर पर कार्रवाई नहीं होने के बाद अदालत का रुख किया गया। याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत ने पुलिस को नोटिस जारी किया और अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
याचिका में भारतीय न्याय संहिता की धारा 196, 299 और 353 समेत संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत FIR दर्ज करने की मांग की गई है। हालांकि, इन धाराओं के तहत मामला दर्ज करने या आरोपों की पुष्टि को लेकर अंतिम निर्णय जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
The learned Chief Judicial Magistrate today issued notice in the petition filed by us under Section 175(3) against Sanjay Azad and his daughter over derogatory posts on X concerning Bhagwan Shri Krishna, Bhagwan Shri Ram, Bhagwan Shiv, Maa Durga and Maa Saraswati.
The concerned… pic.twitter.com/C7JVk9qeDl
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— Amita Sachdeva, Advocate (@SachdevaAmita) September 23, 2026
याचिकाकर्ता ने निशु आजाद से जुड़े एक्स अकाउंट की कई पोस्ट का हवाला दिया है। इनमें भगवान शिव, भगवान श्रीकृष्ण, मां सरस्वती और मां दुर्गा से संबंधित पोस्ट शामिल होने का दावा किया गया है। याचिका में कुछ पोस्टों में हिंदू देवी-देवताओं और धार्मिक ग्रंथों को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों का भी उल्लेख है।
याचिका में यह भी मांग की गई है कि संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट, उनके URL, प्लेटफॉर्म रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर जांच में उनका इस्तेमाल किया जा सके।
फिलहाल अदालत ने दिल्ली पुलिस से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। आगे की कार्रवाई पुलिस की रिपोर्ट और अदालत में होने वाली अगली सुनवाई के आधार पर तय होगी।