वाराणसी। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Shankaracharya Swami Avimukteshwarananda Saraswati) ने मंगलवार को एक फोटो जारी की है, जिसमें प्रयागराज के एडिशनल पुलिस कमिश्नर IPS अजय पाल शर्मा (Prayagraj’s Additional Police Commissioner, IPS Ajaypal Sharma) केक काटते हुए दिख रहे हैं। उनके साथ आशुतोष ब्रह्मचारी (जिन्हें शंकराचार्य ने “हिस्ट्रीशीटर” कहा है) खड़े हैं। यह फोटो उन्होंने मीडिया के सामने दिखाई और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि यह तस्वीर साबित करती है कि उनके खिलाफ POCSO एक्ट (POCSO Act) के तहत दर्ज मामले में साजिश रची जा रही है, क्योंकि जांच संबंधित अधिकारी (अजय पाल शर्मा) के अधीन है, जो आरोप लगाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी (Ashutosh Brahmachari) के साथ सार्वजनिक रूप से जुड़े दिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में निष्पक्ष जांच कैसे संभव है?
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यह विवाद तब तेज हुआ जब प्रयागराज के झूंसी थाने में शंकराचार्य और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी (Mukundananda Brahmachari) के खिलाफ बाल यौन शोषण (POCSO एक्ट) के आरोपों में FIR दर्ज हुई। FIR स्पेशल POCSO कोर्ट के आदेश पर हुई, जिसमें आशुतोष ब्रह्मचारी (जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य) ने याचिका दायर की थी। आरोप माघ मेले/महाकुंभ के दौरान दो नाबालिगों से संबंधित हैं। शंकराचार्य ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और योजनाबद्ध साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि आशुतोष ब्रह्मचारी (Ashutosh Brahmachari) पर पहले भी कई आपराधिक मामले हैं और वे “हिस्ट्रीशीटर” हैं।
उन्होंने पुलिस पर भी पक्षपात का आरोप लगाया कि FIR कोर्ट के आदेश के बाद ही दर्ज हुई, पहले नहीं।वहीं, IPS अजय पाल शर्मा (पूर्व में डेंटिस्ट से IPS बने) की पृष्ठभूमि पर भी चर्चा हो रही है। कुछ रिपोर्ट्स में उन्हें ईमानदार अधिकारी बताया गया है, लेकिन इस फोटो के बाद विवाद बढ़ा है। आशुतोष ब्रह्मचारी (Ashutosh Brahmachari) ने फोटो को AI जनरेटेड बताया है। शंकराचार्य ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है, और पुलिस जांच तेज कर रही है। मामला संवेदनशील है, जिसमें धार्मिक, कानूनी और प्रशासनिक पहलू जुड़े हैं। दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र जांच जरूरी है।