Sindoor mark on the main entrance : हिंदू धर्म में सिंदूर का विशेष धार्मिक और अध्यात्मिक महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए मांग में सिंदूर भरती हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। इसी प्रकार पूजा पाठ, यज्ञ , अनुष्ठान ,पूजन और मांगलिक कार्यों में सिंदूर का प्रयोग किया जाता है।
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हिंदू धर्म में गजानन श्रीगणेश और हनुमानजी को सिंदूर चढ़ाने की परंपरा रही है। वास्तु शास्त्र में भी सिंदूर यानी कुमकुम को लेकर कई तरह के उपाय बताए गए हैं। सिंदूर के उपयोग से सुख-समृद्धि हासिल की जा सकती है। साथ ही, आर्थिक समस्याओं से भी छुटकारा पा सकते हैं। आइए जानते हैं ।
घर से बाधाएं दूर करना
सिन्दूर और तेल को मिलाकर घर के दरवाजे पर लगाएं। इससे घर की अशांति दूर होती है और घर के सभी दोष भी दूर हो जाते हैं। इससे घर में कोई भी नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं कर पाती है और घर के अंदर मौजूद सभी परेशानियां, दुख-दर्द और कष्टदायक ऊर्जा बाहर निकल जाती है। पति-पत्नी के बीच प्रेम भी बढ़ता है। प्रवेश द्वार पर तेल लगाने से दरवाजा लंबे समय तक सुरक्षित रहता है। इसलिए मुख्य द्वार पर सिंदूर लगाने की यह परंपरा चली आ रही है।
घर के मुख्य द्वार पर सिंदूर से ओम् या स्वास्तिक बनाने से घर के अंदर पॉजिटिविटी का संचार होता है। कई बार ऐसा होता है कि घर के ठीक सामने बिजली का खंभा, टी-प्वाइंट या फिर दरवाजे के सामने दूसरे मकान का दरवाजा बना होता है, जो अच्छा नहीं माना जाता।
यह नेगेटिविटी को बढ़ाता है। लेकिन अगर मुख्य द्वार पर सिंदूर से ओम या स्वास्तिक बनाया जाए तो इस नेगेटिव एनर्जी को दूर किया जा सकता है। यहां इस बात का ध्यान दें कि दरवाजे पर रेड पेंट से ओम् या स्वास्तिक ना बनाएं, बल्कि सिंदूर या कुमकुम का ही इस्तेमाल करें।