Deportation of Indian citizens from the US: अमेरिका में कथित रूप से अवैध रूप से रह रहे भारतीय नागरिकों के निर्वासन के मुद्दे पर देश की सियासत गरमाती हुई नजर आ रही है। इस मुद्दे पर गुरुवार को विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा और लोकसभा में चर्चा की मांग की। जिसके बाद जोरदार हंगामा हुआ और दोनों सदनों की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक स्थगित करना पड़ा।
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संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले अमेरिका से भारतीय नागरिकों के निर्वासन पर कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा, “यह देखना बहुत दर्दनाक और अपमानजनक है कि भारतीयों को जंजीरों में जकड़कर भारत वापस लाया जा रहा है… यह सरकार चुप क्यों है?… सरकार को इसकी कड़ी निंदा करनी चाहिए। वे (निर्वासित भारतीय नागरिक) अवैध रूप से वहां रहे होंगे, उन्हें एजेंटों द्वारा धोखा दिया गया होगा, लेकिन उन्हें अपमानित करना और अमानवीय व्यवहार अस्वीकार्य है। इसलिए, हम विदेश मंत्री जयशंकर से एक बयान चाहते हैं। उन्हें संसद में एक बयान देना चाहिए। हम इसे संसद में उठाएंगे।”
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा में चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया। जिसमें कहा गया, “अमेरिकी सरकार द्वारा अवैध भारतीय प्रवासियों का अचानक निर्वासन जारी है…सरकार को इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए और अमेरिकी अधिकारियों के साथ बातचीत करने तथा निर्वासित व्यक्तियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने के लिए किए जा रहे कूटनीतिक उपायों की रूपरेखा तैयार करनी चाहिए।”
प्रस्ताव में कहा गया है, “यह संकट अवैध प्रवास को रोकने तथा विदेश में रोजगार चाहने वालों के लिए संरचित कानूनी रास्ते बनाने के लिए मजबूत नीतियों की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। मानव तस्करी नेटवर्क को खत्म करने, निर्वासित लोगों को वित्तीय और सामाजिक पुनः एकीकरण सहायता प्रदान करने तथा भविष्य में भारतीयों को ऐसी विपत्तियों से बचाने के लिए पारदर्शी प्रवासन ढांचे की स्थापना करने के लिए हस्तक्षेप की तत्काल आवश्यकता है। सरकार को प्रभावित हजारों लोगों के हितों की रक्षा करने तथा भारत की कूटनीतिक विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए निर्णायक रूप से कार्य करना चाहिए।”
बता दें कि बुधवार को 104 अवैध प्रवासियों को लेकर अमेरिकी सैन्य विमान बुधवार को अमृतसर एयरपोर्ट पर उतरा था। इस विमान में 33-33 भारतीय हरियाणा और गुजरात से, 30 पंजाब से, तीन-तीन महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश से और दो चंडीगढ़ से थे। इनमें 19 महिलाएं और 13 नाबालिग शामिल हैं।