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अभिजीत दिपके और नेहा बोरा की प्रेस में हंगामा और नारेबाजी, ‘बंद करो, दफा हो जाओ’, सीजेपी चीफ बोले-इन्हें दे दीजिए 50-100 का नोट

By santosh singh 
Updated Date

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दिपके (Abhijit Dipke) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की नेता नेहा बोरा, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण समेत अन्य को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान फिर से विरोध का सामना करना पड़ा। दिल्ली के प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कुछ लोगों ने नारेबाजी करते हुए इन लोगों का विरोध किया। लोगों ने ‘बंद करो, दफा हो जाओ’ जैसे नारे लगाते हुए विरोध दर्ज किया।

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50-100 के नोट के लिए ही ऐसी हरकत : दीपके

अचानक वहां हंगामा खड़ा हो गया। सभी पत्रकार पीछे की ओर मुड़ गए। नेहा बोरा ने उन्हें शांत करने की कोशिश की। फिर उन्होंने प्रेस क्लब के प्रबंधन से अपील की कि हंगामा कर रहे लोगों को बाहर किया जाए। तभी अभिजीत दीपके ने माइक संभाला और आरोप लगाया कि पैसे के लिए ऐसा करने वाले लोग हैं। उन्होंने कहा, ‘इनको 50-100 का नोट दे दीजिए। इसलिए वे आए हैं। प्रेस क्लब वालों से कहता हूं कि इन्हें 50-100 का नोट देकर बाहर कर दीजिए। 50-100 के लिए ऐसी हरकतें कर रहे हैं।’ नेहा ने कहा- उन्हें एक कोने में ऐसा करने दीजिए आप लोग कवर करिए। वो स्टूडियो में जो सीखते हैं वही यहां कर रहे हैं।

सीजेपी और अन्य संगठनों ने लोगों से शनिवार को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में राष्ट्रीय ध्वज लेकर पहुंचने का आह्वान किया है। आम आदमी पार्टी (आप) ने भी इस आह्वान का समर्थन किया है। यह कार्यक्रम मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे आंदोलन का अगला चरण बताया जा रहा है।

विपक्षी नेताओं की हिरासत पर उठाए सवाल

अभिजीत दिपके ने कहा कि दिल्ली में पिछले 10 से 15 दिनों से छात्र संगठन और युवा सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके मुताबिक, प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया जा रहा है और हिरासत में लिया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि जब विपक्षी नेता प्रदर्शन में शामिल हुए तो उन्हें भी हिरासत में लिया गया। इनमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और पिनाराई विजयन जैसे नेताओं का जिक्र किया गया।

दिपके ने कहा कि आंदोलन के दौरान रेलवे सेवाएं भी बंद की गईं। उन्होंने दावा किया कि 10 अक्तूबर को प्रदर्शन के आह्वान के बाद ऐसा हुआ और यह देश के इतिहास में संभवतः पहली बार था। उन्होंने दिल्ली में मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने और जम्मू-कश्मीर से सुरक्षा बलों को बुलाए जाने का आरोप भी लगाया। उनके बयान के मुताबिक, प्रदर्शन को रोकने के लिए उठाए गए इन कदमों पर सवाल उठाए जाने चाहिए।

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नेहा बोरा ने लगाए क्या आरोप?

वहीं, नेहा बोरा ने एक महिला पत्रकार से जुड़े मामले का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पत्रकार ने विवेक भगत के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस से संपर्क किया था, लेकिन बाद में उसी पत्रकार के खिलाफ भी जवाबी प्राथमिकी (काउंटर एफआईआर) दर्ज कर दी गई। बोरा ने इस घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए कहा कि न्याय की मांग करने वाले लोगों की शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की भूमिका कानून-व्यवस्था बनाए रखने और शिकायतों की जांच करने की है, न कि किसी राजनीतिक पक्ष का समर्थन करने की।

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