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Vallabhacharya Jayanti 2024 : श्री वल्लभाचार्य जयंती के दिन करें भगवान श्री कृष्ण  की पूजा , बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है

By अनूप कुमार 
Updated Date

Vallabhacharya Jayanti 2024 : वैष्णव दार्शनिक आचार्य वल्लभ का जन्म वैशाख माह में कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को वरूथिनी एकादशी दिन एक वैदिक तेलुगु तैलंग वेलनाड़ ब्राह्मण परिवार में हुआ था। आपके पिता सोमयाजी दीक्षित श्रीलक्ष्मण भट्टजी और माताश्री देवी इल्लमागारुजी भट्टजी है। वल्लभ नाम का शाब्दिक अर्थ है प्रिय या प्रेमी, और यह विष्णु और कृष्ण का एक नाम है। वल्लभाचार्य जयंती के जन्मदिन पर मुख्य रूप से श्री कृष्ण की पूजा की जाती है। क्योंकि वल्लभ अंश जी भगवान कृष्ण के बहुत बड़े भक्त थे। श्री कृष्ण भक्ति के भक्तिकालीन प्रणेता श्री वल्लभाचार्य जी की जयंती भारत में किसी लोकप्रिय त्योहार से कम नहीं है। श्री वल्लभाचार्य की जंयती पूरे भारत में धूमधाम से मनाई जाती है।

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श्री वल्लभ आचार्य ने भारत के ब्रज क्षेत्र में कृष्ण-घोषणा समझौते और वैष्णववाद के शुद्ध अद्वैत दर्शन की स्थापना की। मान्यता है कि  श्री वल्लभाचार्य ने गोवर्धन पर्वत पर भगवान के दर्शन किये थे। इसीलिए उपासक वल्लभाचार्य जयंती बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है। कुछ मान्यताओं के आधार पर यह माना जाता है कि वल्लभाचार्य ही एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे जिनकी मुलाकात भगवान श्री कृष्ण से श्रीनाथजी के रूप में हुई थी, उन्हें यह अवसर प्राप्त हुआ था। ऐसा कहा जाता है कि अग्निदेव का पुण्य वल्लभाचार्य जी का है।

श्री वल्लभाचार्य की 545वीं जयंती

वल्लभाचार्य जयंती शनिवार 4, मई 2024

 

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श्री वल्लभाचार्य की रचनाएं भी हैं खास

श्री वल्लभाचार्य अपनी रचनाओं के लिए प्रसिद्ध थे। उनकी प्रमुख सोलह रचनाओं को षोडष ग्रंथ के नाम से भी जाना जाता है। इन रचनाओं में प्रमुख है यमुनाष्टक, बालबोध, सिद्धांत मुक्तावली, पुष्टि प्रवाह मर्यादा भेद, सिद्धांत रहस्य, नवरत्न स्तोत्र, अंतःकरण प्रबौध, विवेक धैर्याश्रय, श्री कृष्णाश्रय, चतुःश्लोकी, भक्तिवर्धिनी, जलभेद, पन्चपद्यानि, सन्यास निर्णय, निरोध लक्षण, सेवाफल इत्यादि।

 

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