Republic Day 2026 : भारत के इतिहास में प्रथम गणतंत्र दिवस समारोह (First Republic Day Celebrations) का ऐतिहासिक आयोजन इतिहास में अमिट अक्षरों में अंकित है। तारीख- 26 जनवरी, वर्ष- 1950 ,दिन- गुरुवार ,समय- सुबह 10 बजकर 18 मिनट भारत स्वतंत्र, संप्रभु गणराज्य घोषित हुआ। भारतीय इतिहास (Indian History) में यह एक नए अध्याय की शुरुआत थी। खुशी और उल्लास के बो अविस्मरणीय क्षण थे। भारत के स्वतंत्र संप्रभु गणराज्य (Independent Sovereign Republic) घोषित होने के ठीक 6 मिनट बाद गणतंत्र भारत (Republic of India) के पहले राष्ट्रपति के रूप में डॉ राजेंद्र प्रसाद (Dr. Rajendra Prasad) ने शपथ ली। उन्हें कुछ ही मिनटों बाद सुबह 10:30 बजे 21 तोपों की सलामी दी गई।
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पहली बार इतने बड़े देश में एक ही कानून और एक ही विधान लागू
26 जनवरी 1950 को घोषणा की गई कि भारत अब एक लोकतांत्रिक संप्रभु गणराज्य है और विभिन्न राज्य गणराज्य की इकाई हैं। भारत के संविधान में इस शासन व्यवस्था की विस्तृत अवधारणा प्रस्तुत की गई ताकि भविष्य में किसी तरह का राजनीतिक संकट न खड़ा हो। राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद (Dr. Rajendra Prasad) ने शपथ ग्रहण करने के बद एक संक्षिप्त भाषण दिया पहले हिंदी में उसके बाद अंग्रेजी में। अपने भाषण में मुख्य रूप से उन्होंने कहा कि इतिहास में पहली बार आज हिंदुस्तान कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक के विस्तृत भूभाग का स्वामी बन बना है। पहली बार इतने बड़े देश में एक ही कानून और एक ही विधान लागू होगा।
हमारे महान संविधान की अब यह महान जिम्मेदारी होगी कि वह 32 करोड़ भारतीयों की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए वह सब कुछ करें जिसकी आवश्यकता हो। अब भारत के लोगों के लिए प्रशासन की जिम्मेदारी भारतीयों की होगी। हमारे पास अब यह ऐतिहासिक अवसर है कि हम अपनी जनसंख्या को समृद्ध और खुशहाल बनाएं। अब हमें महान देश भारत का भाग्य अपने हाथों से लिखना है।
तब से भारत में हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस (Republic Day) बड़े उत्साह और भव्य परेड के साथ मनाया जाता है, जिसमें काफी खर्चा भी होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि 1950 में पहला गणतंत्र दिवस (Republic Day) मात्र 11,093 रुपए में मनाया गया था। न कोई भव्य मंच, न भारी सुरक्षा व्यवस्था और न ही बड़ी परेड, लेकिन उस दिन देश में जो उत्साह और गर्व था, वो ऐतिहासिक बन गया। ये आज के करोड़ों रुपए के कार्यक्रमों की तुलना में बेहद सादगीपूर्ण, लेकिन भावनाओं से भरपूर रहा। आइए जानते हैं उस ऐतिहासिक दिन की पूरी कहानी?
सादगी से हुआ था पहला राष्ट्रीय उत्सव
आज के मुकाबले उस समय देश आर्थिक रूप से कमजोर था। आजादी मिले ज्यादा वक्त नहीं हुआ था और देश विभाजन की पीड़ा से उबर रहा था। ऐसे में सरकार ने तय किया कि गणतंत्र दिवस (Republic Day) को सादगी और सामाजिक सरोकारों के साथ मनाया जाएगा। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, पहले गणतंत्र दिवस के आयोजन पर कुल 11,093 रुपये खर्च किए गए। ये रकम मुख्य रूप से स्कूलों, राहत गृहों और सामाजिक संस्थानों में छोटे-छोटे कार्यक्रमों पर खर्च हुई।
बच्चों और महिलाओं पर रहा खास ध्यान
उस समय दिल्ली और आसपास के इलाकों में कई राहत शिविर और महिला आश्रय गृह थे, जहां देश विभाजन से प्रभावित लोग रह रहे थे। गणतंत्र दिवस (Republic Day) के मौके पर इन जगहों पर विशेष कार्यक्रम हुए। स्कूल के बच्चों को स्मृति चिन्ह और थालियां दी गईं। महिला आश्रय गृहों में फल, मिठाई और छोटे उपहार बांटे गए। गरीब और जरूरतमंद बच्चों के लिए सादा भोजन और कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन आयोजनों का मकसद दिखावा नहीं, बल्कि ये संदेश देना था कि नया भारत हर नागरिक के साथ खड़ा है।
कैसे ऐतिहासिक बना पहला गणतंत्र दिवस?
1950 में आज जैसी भव्य सैन्य परेड नहीं हुई थी। न राजपथ पर लंबा जुलूस था और न ही विदेशी मेहमान। फिर भी ये दिन इसलिए खास था क्योंकि भारत ने खुद को अपने संविधान के तहत शासित देश घोषित किया। उस दिन हिंदुस्तान ने ये दिखा दिया कि लोकतंत्र की ताकत हथियारों या खर्च से नहीं, बल्कि संविधान और जनता के भरोसे से आती है। धीरे-धीरे गणतंत्र दिवस (Republic Day) का स्वरूप बदलता गया। परेड, सांस्कृतिक झांकियां और सेना की ताकत का प्रदर्शन इसमें जुड़ता चला गया। आज ये समारोह भारत की सांस्कृतिक विविधता और सैन्य शक्ति का प्रतीक बन चुका है।