मुंबई। महाराष्ट्र के नेताओं राज ठाकरे (Raj Thackeray) और उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) ने 72 साल के इतिहास में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह (National Film Awards Ceremony) को दिल्ली से गुजरात शिफ्ट किए जाने के फैसले की आलोचना की है। वहीं, शिवसेना के सांसद संजय राउत (Shiv Sena MP Sanjay Raut) ने कलाकारों से इस समारोह का बहिष्कार करने की अपील की है। लोकेशन बदले जाने पर राज ठाकरे (Raj Thackeray) ने आपत्ति जताते हुए लिखा कि आखिर इसकी जरूरत क्यों पड़ी? देश की आर्थिक राजधानी मुंबई का महत्व कम करने की कोशिश के बाद अब क्या देश की राजधानी दिल्ली की अहमियत भी धीरे-धीरे खत्म करने की कोशिश हो रही है?
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दक्षिण भारत सिनेमा ने राजनीति तक को प्रभावित किया , फिर गुजरात को ही क्यों चुना गया?
आगे उन्होंने लिखा कि ‘सवाल सीधा है, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का आयोजन गुजरात में ही क्यों? अगर जगह बदलनी ही थी तो मुंबई क्यों नहीं? दादासाहेब फाल्के (Dadasaheb Phalke) ने भारतीय सिनेमा की नींव महाराष्ट्र में रखी थी। फिर पुरस्कार समारोह महाराष्ट्र में क्यों नहीं हुआ? तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर फिल्में बनती हैं। दक्षिण भारत सिनेमा ने राजनीति तक को प्रभावित किया है। फिर गुजरात को ही क्यों चुना गया?
For the first time in the 72-year history of the National Film Awards, the ceremony is being shifted from the national capital, Delhi, to Kevadia in Gujarat. While there is an ongoing concerted effort to diminish the importance of Mumbai, the country's financial capital, a… pic.twitter.com/autVMvePN4
— Raj Thackeray (@RajThackeray) September 10, 2026
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आगे उन्होंने लिखा कि ‘ऐसा लगता है कि खुद कुछ बड़ा करने में नाकाम लोग अब नाम और जगह बदलकर एक नया इतिहास बनाने की कोशिश कर रहे हैं। शायद उन्हें डर है कि कल को उनका राजनीतिक प्रभाव सिर्फ गुजरात तक सीमित रह जाए, इसलिए आज से ही गुजरात को हर चीज का केंद्र बनाने की कोशिश की जा रही है।
गुजरात को आगे क्यों किया जा रहा- राज ठाकरे
राज ठाकरे ने सिर्फ नेशनल फिल्म अवॉर्ड ही नहीं बल्कि कॉमनवेल्थ, 2023 क्रिकेट वर्ल्ड कप की लोकेशन भी गुजरात रखने पर सवाल किया। उन्होंने पूछा है कि इससे अमित शाह देश को क्या बताना चाहते हैं। उन्होंने लिखा कि’मुद्दा यह नहीं है कि समारोह केवड़िया में हो रहा है या मुंबई में। असली सवाल यह है कि 72 साल से चली आ रही एक शानदार परंपरा को आखिर क्यों तोड़ा जा रहा है? राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार देश की राजधानी दिल्ली में दिए जाते रहे हैं। अब अचानक इस परंपरा को बदलने की जरूरत क्यों पड़ी? अमेरिका में ऑस्कर हमेशा लॉस एंजिलिस में होता है। वहां ट्रंप आए, बुश आए या ओबामा, किसी ने यह कोशिश नहीं की कि पुरस्कार समारोह अपने गृह राज्य में ले जाएं।
‘हम इस मुद्दे पर आवाज जरूर उठाएंगे, लेकिन देशभर के कलाकारों को भी सामने आना होगा। कलाकारों को पूछना होगा कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की गौरवशाली परंपरा को क्यों तोड़ा जा रहा है।’
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संजय राउत ने सेलेब्स से सेरेमनी बॉयकॉट करने की अपील की
शिवसेना नेता संजय राउत ने भी गुजरात में सेरेमनी रखे जाने की निंदा की। उन्होंने कहा कि ये गुजरात से जुड़ा कोई प्रोग्राम नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय फिल्म पुरुस्कार है, तो इसकी लोकेशन गुजरात क्यों रखी गई। इसे राजधानी में ही रखना था, जैसा पिछले कई सालों से चला आ रहा है। उन्होंने अन्य सेलेब्स से इस इवेंट में न जाने और इसे बॉयकॉट करने की अपील की है।
इस बार गुजरात में होगा समारोह
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह आम तौर पर नई दिल्ली में होता रहा है। पिछले साल 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का समारोह 23 सितंबर 2025 को दिल्ली के विज्ञान भवन में हुआ था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए थे।
अब 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के लिए परंपरा में बदलाव किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इस बार समारोह दिल्ली से बाहर गुजरात के एकता नगर (केवड़िया) में आयोजित करने की तैयारी है। इसे राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह का पहला दिल्ली के बाहर आयोजन बताया जा रहा है।
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के विजेताओं की घोषणा 18 जुलाई 2026 को की जा चुकी है। इनमें ‘आर्टिकल 370’ को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार मिला। फिल्म की अभिनेत्री यामी गौतम को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का सम्मान मिला, जबकि सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार कार्तिक आर्यन (‘चंदू चैंपियन’) और ममूटी (‘ब्रह्मयुगम’) को संयुक्त रूप से दिया गया।
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राष्ट्रपति मुर्मू के हाथों पुरस्कार मिलने की संभावना
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का 22 सितंबर को गुजरात दौरा प्रस्तावित है। वह महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी ऑफ बड़ौदा के दीक्षांत समारोह में शामिल होंगी और इसके बाद पदरा में ब्रह्माकुमारीज के कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी। इसी दौरे में उनके एकता नगर जाने की भी संभावना है, जहां वह 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान कर सकती हैं।
एकता नगर क्यों चुना गया?
एकता नगर गुजरात के नर्मदा जिले में स्थित है और यहां स्टैच्यू ऑफ यूनिटी प्रमुख आकर्षण है। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह (National Film Awards Ceremony) को यहां आयोजित करने से इसे गुजरात के प्रमुख पर्यटन और राष्ट्रीय एकता से जुड़े स्थल के साथ जोड़ने का संदेश जाता है। हाल ही में 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों (72nd National Film Awards) में आनंद एल राय (Aanand L Rai) की डॉक्यूमेंट्री ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी-एकता का प्रतीक’ (‘Statue of Unity – A Symbol of Unity’) को भी सम्मान मिला है। यह स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और केवड़िया के विकास की कहानी पर आधारित है।