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चित्रकूट में विलुप्त सरयू नदी की खोज के लिए सैटेलाइट और रोवर तकनीक से शुरू हुआ महासर्वेक्षण

By Sushil Sah 
Updated Date

चित्रकूट। चित्रकूट में कंक्रीट के जाल और अवैध अतिक्रमण के कारण पूरी तरह विलुप्त हो चुकी सरयू नदी को नया जीवन देने की कवायद फिर से शुरू हो गई है। इस ऐतिहासिक नदी की पुरानी जलधारा को ढूंढने के लिए प्रशासन अब आधुनिक विज्ञान का सहारा ले रहा है। बता दें कि यहां राजस्व विभाग, नगर पालिका और संयुक्त क्षेत्र विकास प्राधिकरण की संयुक्त टीम ने नदी के मार्ग को ट्रेस करने के लिए एक हाई-टेक वैज्ञानिक सर्वे शुरू किया है।

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आधुनिक तकनीक से तय होगी नदी की सीमा

अधिकारियों ने बताया हैं कि इस महासर्वेक्षण में GNSS Rover और सैटेलाइट तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। बता दें कि यह तकनीक सैटेलाइट सिग्नलों के जरिए जमीन की सटीक बनावट और टोपोग्राफी का डेटा तैयार करती है। इससे नदी के प्राचीन प्रवाह क्षेत्र और उसकी वास्तविक सीमाओं का सही और सटीक नक्शा तैयार किया जा सकेगा। जब सर्वे पूरा हो जाएगा तब उसके बाद नदी की भूमि पर पिलर लगाकर सीमांकन किया जाएगा। जिससे भविष्य में रामघाट और आसपास के क्षेत्रों में अवैध अतिक्रमण पर पूरी तरह रोक लगाई जा सकेगी।

जीवित होगा चित्रकूट का ‘त्रिवेणी संगम’

पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, कामदगिरि पर्वत क्षेत्र से निकलने वाली सरयू नदी लगभग पांच किलोमीटर लंबी है। यह राघव प्रयागघाट में जाकर मंदाकिनी नदी में मिल जाती थी। इसी स्थान पर पयश्वनी नदी का भी मिलन होता था, जिससे यहां एक पवित्र त्रिवेणी संगम बनता था।समय के साथ सरयू नदी का अस्तित्व पूरी तरह समाप्त होने से यह संगम भी प्रभावित हुआ। इस वैज्ञानिक सर्वे के माध्यम से नदी के पुराने जलमार्ग को खोजा जाएगा। साथ ही उससे जुड़े उन बंद हो चुके प्राकृतिक जलस्रोतों की भी पहचान की जाएगी जो कभी इसे पानी देते थे।

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मंदाकिनी नदी को मिलेगा फायदा

बता दें कि इस परियोजना के सफल होने से न सिर्फ चित्रकूट की एक खोई हुई धरोहर वापस लौटेगी, बल्कि इसका सीधा फायदा मंदाकिनी नदी को भी मिलेगा। सरयू की जलधारा दोबारा शुरू होने से मंदाकिनी नदी में जल का संकट दूर होगा और उसका प्रवाह साल भर मजबूत बना रहेगा।

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