उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर बीजेपी ने अपने पत्ते खोल दिए हैं। पार्टी ने सोमवार को आठ उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया। लिस्ट सामने आते ही उन बड़े नामों को लेकर चर्चा शुरू हो गई, जो पिछले कई दिनों से टिकट की दौड़ में बताए जा रहे थे, लेकिन अंतिम सूची में जगह नहीं बना सके...
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर बीजेपी ने अपने पत्ते खोल दिए हैं। पार्टी ने सोमवार को आठ उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया। लिस्ट सामने आते ही उन बड़े नामों को लेकर चर्चा शुरू हो गई, जो पिछले कई दिनों से टिकट की दौड़ में बताए जा रहे थे, लेकिन अंतिम सूची में जगह नहीं बना सके।
कौन हैं BJP के 8 चेहरे?
धर्मपाल सिंह: आंवला से कई बार विधायक रह चुके धर्मपाल सिंह योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। वह लोधी समाज से आते हैं और प्रदेश की राजनीति में पार्टी का प्रमुख पिछड़ा चेहरा हैं।
राधाकांत ओझा: इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके हैं। उनका नाम इससे पहले भी भाजपा के संभावित उम्मीदवारों में सामने आता रहा है।
प्रकाश पाल: भाजपा पिछड़ा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हैं। संगठन में लंबे समय से सक्रिय प्रकाश पाल कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
विद्यासागर सोनकर: जौनपुर के वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व लोकसभा सांसद हैं। पार्टी संगठन में प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
गोपी कृष्ण पांडेय: संगठन से जुड़े लो-प्रोफाइल नेता हैं। किसान मोर्चा में काम करने के साथ अलग-अलग राज्यों में संगठन की जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।
प्रियंका सिंह रावत: बाराबंकी से 2014 में भाजपा सांसद चुनी गई थीं। वर्तमान में पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। सूची में उन्हें महिला और दलित प्रतिनिधित्व के महत्वपूर्ण चेहरे के तौर पर जगह मिली है।
राम प्रताप सिंह चौहान: आगरा की एत्मादपुर सीट से विधायक रह चुके हैं। फिलहाल भाजपा के प्रदेश महामंत्री हैं और पश्चिमी यूपी संगठन की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
श्रुति गंगवार: बरेली से आने वाली भाजपा नेत्री और झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी हैं। वह अर्बन कोऑपरेटिव बैंक की चेयरमैन भी हैं। उनके नाम से पार्टी ने बरेली क्षेत्र को भी प्रतिनिधित्व दिया है।

हरदीप पुरी, बीएल वर्मा समेत सभी 8 मौजूदा BJP सांसद बाहर
भाजपा की सूची का सबसे बड़ा संदेश यह है कि राज्यसभा का कार्यकाल पूरा कर रहे हरदीप सिंह पुरी, बीएल वर्मा, अरुण सिंह, गीता शाक्य, नीरज शेखर, बृजलाल और सीमा द्विवेदी में से किसी को दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया गया। डॉ. दिनेश शर्मा भी इस सूची में नहीं हैं। उन्होंने सितंबर में अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल बनाए जाने के बाद राज्यसभा से इस्तीफा दिया था।
यानी भाजपा ने इस बार राज्यसभा में पुराने चेहरों को दोहराने के बजाय पूरी तरह नई टीम उतारने का फैसला किया है। केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी का टिकट कटना सबसे ज्यादा चौंकाने वाले फैसलों में माना जा रहा है।
स्मृति ईरानी, वरुण गांधी, हरीश द्विवेदी भी रह गए बाहर
उम्मीदवारों के ऐलान से पहले भाजपा के संभावित नामों को लेकर कई तरह की चर्चाएं थीं। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, पूर्व सांसद वरुण गांधी और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव हरीश द्विवेदी के नाम प्रमुखता से सामने आए थे। इनके अलावा संजीव बालियान, सत्यपाल सिंह और कुमार विश्वास जैसे नामों को लेकर भी अटकलें थीं। लेकिन अंतिम सूची में इनमें से किसी को जगह नहीं मिली।
खास तौर पर स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी के नाम को लेकर चर्चा तेज थी। पार्टी के राज्य स्तर के पैनल में भी कई बड़े नाम शामिल बताए गए थे, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने अंतिम सूची में संगठन और जमीनी राजनीति से जुड़े चेहरों को प्राथमिकता दी।
2027 से पहले BJP ने साधा सामाजिक समीकरण
भाजपा की इस सूची में सामाजिक समीकरण भी साफ दिखाई देता है। आठ उम्मीदवारों में तीन ओबीसी, दो दलित और तीन सामान्य वर्ग से हैं। ओबीसी चेहरों में लोधी, पाल और गंगवार समुदाय का प्रतिनिधित्व दिखाई देता है, जबकि दलित वर्ग से विद्यासागर सोनकर और प्रियंका सिंह रावत को मौका मिला है। सामान्य वर्ग से राधाकांत ओझा, गोपी कृष्ण पांडेय और राम प्रताप सिंह चौहान को जगह दी गई है।
यह फैसला ऐसे समय हुआ है जब यूपी में 2027 का विधानसभा चुनाव सामने है। इसलिए भाजपा की राज्यसभा सूची को सिर्फ उच्च सदन के लिए उम्मीदवार चयन के तौर पर नहीं, बल्कि संगठन, क्षेत्र और सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। यूपी की 10 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान 16 अक्टूबर को होना है और इनमें से 8 सीटों पर भाजपा की स्थिति मजबूत मानी जा रही है।