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राहुल, बोले- SC की टिप्पणी से ज्ञानेश कुमार के झूठ का पर्दाफाश, ‘फॉर्म 6 में अवैध-एकतरफा बदलाव’, उनके पद के दुरुपयोग का है एक और सबूत

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar) पर फिर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने मतदाता पंजीकरण से जुड़े फॉर्म 6 में गैरकानूनी और एकतरफा तरीके से बदलाव किया।

By santosh singh 
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नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar) पर फिर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar)ने मतदाता पंजीकरण से जुड़े फॉर्म 6 में गैरकानूनी और एकतरफा तरीके से बदलाव किया। राहुल गांधी (Rahul Gandhi)  ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की टिप्पणी के बाद यह बात बिना किसी शक के स्थापित हो गई है।

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राहुल गांधी (Rahul Gandhi)  ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि अब यह बिना किसी संदेह के स्थापित हो गया है कि ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म 6 में अवैध और एकतरफा तरीके से बदलाव किया। यह भाजपा की मदद के लिए उनके पद के दुरुपयोग का एक और सबूत है। लोकतंत्र पर इस आपराधिक हमले में शामिल वह और बाकी सभी लोग जवाबदेह ठहराए जाएंगे। राहुल गांधी (Rahul Gandhi)  ने अपने दावे के समर्थन में निर्वाचन आयोग की एक पुरानी प्रेस विज्ञप्ति की तस्वीर भी साझा की।

क्या सुप्रीम कोर्ट ने दी थी संशोधित फॉर्म 6 को मंजूरी?
दरअसल, यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार को स्पष्ट किया कि उसने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले संशोधित फॉर्म 6 को मंजूरी नहीं दी है। यह फॉर्म विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में दर्ज करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (Chief Justice Surya Kant) ने सुनवाई के दौरान कहा कि किसी भी संशोधित फॉर्म 6 को हमने मंजूरी नहीं दी है। यह स्पष्ट है। रिकॉर्ड सामने आने पर हम देखना चाहेंगे कि इसमें बदलाव किसने किया?

निर्वाचन आयोग के पुराने बयान पर उठे सवाल

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निर्वाचन आयोग (Election Commission) ने 26 सितंबर को जारी एक बयान में कहा था कि एसआईआर के लिए फॉर्म 6 के साथ जोड़ी गई घोषणा को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)  ने बरकरार रखा था। आयोग ने कहा था कि एसआईआर से अलग अवधि में निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित फॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा।

कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ता आशुतोष रांका ने दावा किया कि आयोग ने बाद में यह प्रेस विज्ञप्ति हटा ली। उन्होंने सोशल मीडिया पर आयोग की ओर से प्रेस विज्ञप्ति हटाए जाने को लेकर टिप्पणी की और ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना साधा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)  ने ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने का एकतरफा अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि पहले निर्वाचन आयोग और अन्य संबंधित पक्षों को सुना जाना जरूरी है।

सीईसी के निलंबन की मांग पर क्या हुआ?

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने केंद्र, निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी, उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग तथा महानिदेशक सूचना प्रौद्योगिकी सीमा खन्ना को नोटिस जारी किया। पीठ ने कहा कि पहले मामले में प्रमाणित जानकारी सामने आनी चाहिए। अदालत ने कहा कि अगर जरूरत हुई तो किसी फैसले को बाद में रद्द किया जा सकता है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त को तत्काल निलंबित करने की मांग की। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले दोनों अन्य निर्वाचन आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद एकतरफा तरीके से लिए गए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम की धारा 18 का हवाला देते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग के फैसले सर्वसम्मति से होने चाहिए और मतभेद की स्थिति में बहुमत के आधार पर लिए जाने चाहिए।

पीठ ने पूछा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को निलंबित करने के बाद चुनाव कौन कराएगा। इस पर विकास सिंह ने कहा कि दोनों अन्य निर्वाचन आयुक्त आयोग का काम संभाल सकते हैं। अदालत ने कहा कि उसे पहले संबंधित पक्षों के जवाब मिलने के बाद आरोपों की जांच करनी होगी।

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‘उल्लंघन हुआ तो फैसला रद्द करेंगे’

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि वैधानिक व्यवस्था का पालन जरूरी है और अगर इसका उल्लंघन हुआ है तो अदालत संबंधित फैसले को रद्द कर सकती है। न्यायमूर्ति बागची ने भी सवाल किया कि निर्वाचन आयोग को सुने बिना ऐसी राहत कैसे दी जा सकती है। जस्टिस बागची ने कहा कि अगर रिकॉर्ड से बाद में यह साबित होता है कि फैसले सर्वसम्मति से नहीं लिए गए थे, तो अदालत उन्हें कानून के अधिकार से बाहर घोषित कर सकती है। मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि अदालत केवल अखबारों में प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर आदेश पारित नहीं कर सकती।

14 फैसलों पर आपत्तियों का दावा

याचिका में दावा किया गया है कि अक्तूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कम से कम 14 मौकों पर एसआईआर से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्तियां दर्ज की थीं। याचिका के अनुसार, इन आपत्तियों में आरोप लगाया गया कि कुछ संचार निर्वाचन आयोग की मंजूरी के बिना उसके नाम से जारी किए गए। इसके अलावा, बैठकों के एजेंडे और कार्यवृत्त लंबे समय तक साझा नहीं किए गए और मतदाता सूची से जुड़े तकनीकी तंत्र में दोनों निर्वाचन आयुक्तों की भागीदारी या मंजूरी के बिना बदलाव किए गए।

फॉर्म 6 में बदलाव पर भी आपत्ति

याचिका में फॉर्म 6 में बदलाव को लेकर भी आपत्तियों का उल्लेख किया गया है। दावा है कि निर्वाचन आयुक्त विवेक जोशी ने कहा था कि एसआईआर से जुड़ी जानकारी लेने के लिए फॉर्म 6 में बदलाव करने से पहले निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 में संशोधन जरूरी होगा। बाद में निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने भी इस आपत्ति का समर्थन किया था। याचिका में मतदाता सूची के आंकड़ों के केंद्रीकरण और चुनाव संबंधी तकनीकी प्रणालियों तक वैधानिक स्तर के अधिकारियों की पहुंच को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

इसके अलावा, पश्चिम बंगाल में कुछ मतदाताओं को शामिल करने के न्यायिक अधिकारियों के निर्देश के खिलाफ निर्वाचन आयोग के नाम से अपील दायर किए जाने का मुद्दा भी उठाया गया है। संधू ने कथित तौर पर सवाल किया था कि इन अपीलों को दायर करने की अनुमति किसने दी और इसके लिए अधिकार किसके पास था।

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याचिका में क्या मांग की गई?

याचिका में चुनावी सूची से जुड़े आंकड़ों और उनके रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने, फॉर्म 6 में आगे किसी महत्वपूर्ण बदलाव पर रोक लगाने और मामले की सुनवाई पूरी होने तक आंकड़ों में अपरिवर्तनीय बदलाव से सुरक्षा की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद के कार्यों का इस्तेमाल करने से रोकने और निर्वाचन आयोग का काम दोनों अन्य निर्वाचन आयुक्तों के माध्यम से संचालित करने का अंतरिम निर्देश देने की भी मांग की है।

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अभी नहीं आया है। सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है और कहा है कि रिकॉर्ड मिलने के बाद ही आरोपों पर आगे विचार किया जाएगा।

 

 

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