नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी (SP) के मुखिया अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने योगी सरकार (Yogi Government) के 10वें बजट पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि आज हम एक पहेली से अपनी प्रेस कांफ्रेंस शुरू करना चाहते हैं। पहेली है जब मुंह खोला तब बुरा बोला। ये विदाई बजट है, अब बीजेपी (BJP) की विदाई तय है। सरकार 9 लाख करोड़ के बजट को अपनी उपलब्धि बता रहे।
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अखिलेश यादव ने कहा कि हर बजट पिछले बजट के मुकाबले बड़ा होता है, लेकिन पिछले बजटों को कंपेयर किया तो देखा गया कि सरकार अपने बजट का 50 प्रतिशत भी खर्च नहीं कर पाई। ये सरकार का फेलियर है। यूपी सरकार का कहना है कि 2025-26 में GSDP 30.25 लाख करोड़ है और इस बजट में अनुमान है वो 36 प्रतिशत है, लेकिन सरकार 3 ट्रिलियन इकॉनमी की बात कर रही है तो मैं बताना चाहूंगा कि 3 ट्रिलियन इकॉनमी के लिए 90 लाख करोड़ की GSDP होनी चाहिए।
यूपी सरकार के विदाई बजट के साथ भाजपा की भी विदाई तय है। pic.twitter.com/gR3eB1xqiD
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) February 11, 2026
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अखिलेश ने सवाल उठाया कि सरकार बजट का आकार तो बढ़ा रही है, लेकिन स्वास्थ्य और कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में 60 प्रतिशत राशि भी खर्च नहीं कर पाई है। उन्होंने तंज कसा कि प्रदेश को 90 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए 30 प्रतिशत की ग्रोथ रेट चाहिए, जो वर्तमान हालातों में नामुमकिन है। किसानों की आय और बेरोजगारी पर सरकार का कोई ठोस प्लान नहीं है।
बजट खर्च करने में फिसड्डी है सरकार
अखिलेश यादव ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार अपनी उपलब्धि गिना रही है, लेकिन असलियत यह है कि वह आवंटित धन का आधा हिस्सा भी खर्च नहीं कर पा रही है। कृषि विभाग में केवल 57 प्रतिशत, स्वास्थ्य में 58 और बेसिक शिक्षा में महज 62 प्रतिशत बजट ही खर्च हो पाया है। उन्होंने पूछा कि जब पुराना बजट ही खर्च नहीं हुआ, तो नए बड़े बजट से जनता का क्या भला होगा। एमएसएमई और कृषि क्षेत्र को मिलने वाला जरूरी सहयोग भी गायब है।
निवेश और रोजगार पर उठाए सवाल
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पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार के 50 लाख करोड़ के निवेश दावों (MOU) पर सवालिया निशान लगाया। उन्होंने कहा कि अगर निवेश जमीन पर उतरा होता, तो सरकार को दोबारा रोजगार देने की बात नहीं कहनी पड़ती। अखिलेश के मुताबिक, सरकार प्रति व्यक्ति आय के मामले में दूसरे देशों से बहुत पीछे है और राशन पाने वालों की असली आय छिपा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की मंशा सरकारी अस्पतालों को ठप कर स्वास्थ्य सेवाओं को निजी हाथों में सौंपने की है।
किसानों और एमएसएमई की अनदेखी
गन्ने के रेट और किसानों की दोगुनी आय के वादे पर अखिलेश ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि नई डील के बाद किसान और एमएसएमई क्षेत्र को सबसे ज्यादा नुकसान होगा। यूपी में रजिस्टर्ड एमएसएमई इकाइयों तक भी सरकार की पहुंच नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेजों की संख्या तो बढ़ा दी गई, लेकिन वहां इलाज की व्यवस्था पूरी तरह नदारद है। अखिलेश ने इसे केवल कागजी बजट बताते हुए जनता की उम्मीदों के साथ खिलवाड़ करार दिया।