अयोध्या, पर्दाफाश। अयोध्या में शनिवार दोपहर एक बड़ा हादसा टल गया, जब परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के 9 दिवसीय लक्ष्मीनारायण यज्ञ के समापन के कुछ ही समय बाद यज्ञ स्थल पर अचानक भीषण आग लग गई। करीब एक एकड़ में फैला कपड़े का विशाल पंडाल देखते ही देखते आग की चपेट में आ गया और कुछ ही मिनटों में पूरी तरह जलकर खाक हो गया।
पढ़ें :- मैनाठेर कांड में 15 साल बाद फैसला: IPS अशोक सिंह पर हमले के 16 दोषियों को उम्रकैद
जानकारी के मुताबिक, इस यज्ञ के लिए भव्य स्तर पर यज्ञशाला तैयार की गई थी, जिसमें 1,251 हवन कुंड बनाए गए थे। शनिवार को आखिरी दिन सुबह 7 बजे से ही हजारों श्रद्धालु और यजमान आहुति देने में जुटे थे। करीब साढ़े 10 बजे विधि-विधान और मंत्रोच्चारण के बीच यज्ञ की पूर्णाहुति दी गई, जिसके बाद धीरे-धीरे भीड़ कम होने लगी और लोग अपने घरों के लिए रवाना हो गए। बताया जा रहा है कि इस पूरे आयोजन में करीब 50 हजार से ज्यादा लोग शामिल हुए थे।
इसी बीच, पूर्णाहुति के कुछ समय बाद अचानक एक यज्ञ कुंड में रखा नारियल फट गया। इससे निकली चिंगारी ने पास में लगे कपड़े के पंडाल को अपनी चपेट में ले लिया। पंडाल ज्वलनशील सामग्री का बना होने के कारण आग ने बहुत तेजी से विकराल रूप ले लिया और देखते ही देखते पूरा ढांचा धू-धू कर जलने लगा।
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने घटना के बाद बताया कि राहत की बात यह रही कि आग लगने के समय यज्ञशाला पूरी तरह खाली हो चुकी थी, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। मौके पर पहले से मौजूद फायर ब्रिगेड ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आग पर काबू पा लिया और स्थिति को नियंत्रण में कर लिया।
यह यज्ञ स्थल राम मंदिर से करीब 800 मीटर की दूरी पर स्थित था। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अगर यह हादसा यज्ञ के दौरान होता, जब हजारों लोग पंडाल में मौजूद थे, तो स्थिति बेहद भयावह हो सकती थी। फिलहाल, इस घटना के बाद सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।