पटना। जन सुराज पार्टी के संस्थापक और बांकीपुर विधानसभा सीट (Bankipur Assembly Seat) के निर्वाचित विधायक प्रशांत किशोर (Elected MLA Prashant Kishor) ने सोमवार सुबह स्पीकर प्रेम कुमार के दफ्तर में एमएलए पद की शपथ ले ली। शपथ लेने के बाद प्रशांत लखीसराय रवाना हो गए हैं, जहां आज सुबह अशोक धाम मंदिर (Ashok Dham Temple) में जल चढ़ाने के लिए लाइन में लगी 7 महिलाओं की भगदड़ मचने से मौत हो गई थी। पटना की बांकीपुर असेंबली सीट (Bankipur Assembly Seat) से जीवन का पहला चुनाव लड़े प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) विधानसभा में पार्टी के इकलौते विधायक होंगे।
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नवंबर 2025 में संपन्न विधानसभा के आम चुनाव में उनकी जन सुराज पार्टी 238 सीटों पर लड़ी थी, लेकिन कोई सीट नहीं जीत पाई थी। तब जन सुराज के 236 कैंडिडेट की जमानत भी जब्त हो गई थी। बांकीपुर से 2025 में जीते नितिन नवीन के भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष और फिर राज्यसभा सांसद बनने के बाद खाली सीट पर उप-चुनाव में प्रशांत ने भाजपा कैंडिडेट नीरज सिन्हा को 19 हजार से ज्यादा वोट से हरा दिया। 2025 में दूसरे नंबर पर रहीं राष्ट्रीय जनता दल की रेखा गुप्ता 15 हजार वोट भी नहीं ला सकीं और जमानत तक गंवा बैठीं।
विधायक की शपथ लेने के बाद प्रशांत किशोर ने मीडिया से पहली बातचीत में कहा कि वह यहां से लखीसराय जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लखीसराय घटना की पूरी जानकारी मिलने के बाद ही कुछ बोलना उचित होगा। इससे पहले प्रशांत ने मीडिया से कहा कि ‘भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर, श्रीकृष्ण बाबू, अनुग्रह नारायण सिंह, नीतीश कुमार, लालू यादव, केदार पांडेय, रामविलास पासवान, सुशील मोदी जैसे लोग जिस सदन के सदस्य के तौर पर काम किए, उस सदन का सदस्य बनना गौरव की बात है। मेरे लिए गौरव के साथ-साथ यह जिम्मेदारी भी है कि जिस सदन में सैकड़ों लोगों ने समाज के लिए और राज्य की बेहतरी के लिए अपने जीवन के बहुमूल्य साल लगाए हैं, उनसे प्रेरणा लेकर बिहार के समाज में बेहतरी के लिए आगे काम करूं, आज इतना ही कहना है।
प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) राजनीति में कूदने से पहले चुनाव रणनीतिकार के तौर पर देश के तमाम प्रमुख दलों और नेताओं के लिए अलग-अलग समय में काम कर चुके हैं। प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) के रिश्ते राजनीति की सीमाओं से परे सभी दलों के नेताओं से हैं, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस के नेता राहुल गांधी, टीएमसी की नेता ममता बनर्जी, वाईएसआर कांग्रेस के नेता जगनमोहन रेड्डी, टीडीपी नेता चंद्रबाबू नायडू, टीवीके नेता विजय शामिल हैं। 2025 में 236 प्रत्याशियों की जमानत जब्त, एक साल में ही PK ने कैसे ढहाया बीजेपी का किला?
बिहार में पीके 2015 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार और लालू यादव के लिए महागठबंधन का काम देखने आए थे, जिसमें जीत के बाद तेजस्वी यादव ने पहली बार बतौर डिप्टी सीएम सत्ता का स्वाद चखा था। बाद में वो जेडीयू में शामिल हुए और नीतीश के नंबर 2 तक की हैसियत तक पहुंच गए। लेकिन बाद में जदयू के पुराने नेताओं ने ऐसा खेल खेला कि वो जेडीयू से निकाल दिए गए। 2 अक्टूबर 2022 को चंपारण से प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने जन सुराज के बैनर तले पदयात्रा शुरू की थी और विधानसभा चुनाव होने तक बिहार का चप्पा-चप्पा छान चुके थे।