कोलकाता। पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) होंगे। इसके अलावा दो डिप्टी सीएम भी होंगे। बता दें कि गृह मंत्रालय सुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) के पास ही रहेगा। 9 मई को शपथ ग्रहण समारोह होगा। इसकी घोषणा गृहमंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) ने आज कोलकाता में की। बंगाल की राजनीति में वह क्षण आ गया है जिसकी कल्पना कुछ साल पहले तक नामुमकिन लगती थी। 2026 के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 207 सीटों के प्रचंड बहुमत के साथ ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के ‘अजेय’ माने जाने वाले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के गढ़ को ध्वस्त कर दिया है। 294 सदस्यीय विधानसभा में TMC महज 80 सीटों पर सिमट गई है। गवर्नर आर.एन. रवि (Governor R.N. Ravi) के तरफ से विधानसभा भंग किए जाने के बाद अब सबकी निगाहें 9 मई पर टिकी हैं, जब बंगाल की पहली BJP सरकार शपथ ले सकती है।
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अमित शाह ने लगाई सुवेंदु के नाम पर मोहर?
गृह मंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) की मौजूदगदी में हुए निर्णय के अनुसार सुवेंदु अधिकारी के नाम पर सभी विधायकों ने सहमति जताई। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में दो डिप्टी सीएम भी होंगे। जिनमें एक डिप्टी सीएम पर रूपा गांगुल (Deputy CM Roopa Ganguly) का नाम फाइनल हो गया है। दूसरे डिप्टी सीएम पर दार्जिलिंग से विधायक बनने वाले पुरुष पर होगी। सबसे बड़ी बात गृह मंत्रालय सुवेंदु अधिकारी के पास ही होगा। विधायक दल की बैठक के बाद आज शाम 5 बजे तीनों के नाम का ऐलान किया जाएगा। कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में 9 मई को मुख्यमंत्री और दोनों डिप्टी CM शपथ लेंगे। शपथ ग्रहण समारोह में PM मोदी, शाह समेत NDA के कई बड़े नेता शामिल होंगे।
सुवेंदु की कैबिनेट के 9 संभावित चेहरे कौन-कौन?
सुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) का है। नंदीग्राम के नायक और ममता बनर्जी को सीधे चुनौती देने वाले सुवेंदु इस जीत के सबसे बड़े शिल्पकारों में से एक माने जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल की संभावित कैबिनेट की सूची में उनके साथ दिलीप घोष (Dilip Ghosh) का नाम भी मजबूती से उभर रहा है, जिन्होंने राज्य में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को खड़ा करने में वर्षों की मेहनत की है। सूची यहीं खत्म नहीं होती। कैबिनेट में ग्लैमर, अनुभव और युवा जोश का संगम देखने को मिल सकता है:
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अग्निमित्रा पॉल (Agnimitra Paul) और रूपा गांगुली जैसे चेहरे महिला नेतृत्व और सांस्कृतिक पहचान का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। निशिथ प्रमाणिक, तपस राय और स्वपन दासगुप्ता जैसे अनुभवी रणनीतिकारों के पास महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी हो सकती है। पेशेवर पृष्ठभूमि से आने वाले डॉ. राजेश कुमार, शंकर घोष और अशोक डिंडा जैसे नाम दिखाते हैं कि BJP इस बार ‘गवर्नेंस’ पर खास जोर देने वाली है।
क्या काम आई BJP की सोशल इंजीनियरिंग?
BJP की इस ऐतिहासिक जीत के पीछे एक सोची-समझी रणनीति थी। पार्टी ने केवल राजनेताओं को ही नहीं, बल्कि शिक्षकों, वकीलों और डॉक्टरों जैसे पेशेवरों को चुनावी मैदान में उतारकर मध्यम वर्ग और बुद्धिजीवियों को अपनी ओर खींचा। सामाजिक विविधता और जमीनी मुद्दों पर आधारित इस ‘सोशल इंजीनियरिंग’ ने TMC के 15 साल के वर्चस्व को उखाड़ फेंका।
शपथ ग्रहण और संवैधानिक टकराव का साया
भले ही विधानसभा भंग हो चुकी है, लेकिन बंगाल की राजनीति में नाटक अभी खत्म नहीं हुआ है। बताया जा रहा है कि निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा भंग करने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था, जिसे गवर्नर ने अपने विशेषाधिकार के तहत अंजाम दिया। अब 9 मई की तारीख बंगाल के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज होने जा रही है, जब कोलकाता के राजभवन में एक नया नेतृत्व शपथ लेगा। बंगाल अब एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां नीतियां बदलेंगी, शासन का तरीका बदलेगा और केंद्र के साथ राज्य के रिश्तों की एक नई इबारत लिखी जाएगी।