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900 करोड़ रुपये के कोडीन सिरप कांड में जज को प्रभावित करने की कोशिश, हाईकोर्ट के न्यायाधीश ने खुद को केस से किया अलग

Codeine Syrup Scandal : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोडीन युक्त कफ सिरप मामले के मुख्य आरोपी भोला जायसवाल समेत 75 आरोपियों की जमानत याचिकाओं की सुनवाई कर रही एकल पीठ के न्यायाधीश कृष्ण पहल ने खुद को इस मामले से अलग कर लिया है। उन्होंने सुनवाई के दौरान तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायाधीश तक पहुंच बनाने या लंबित मामले को प्रभावित करने का कोई भी प्रयास न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला है। इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद जज ने कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे हाईकोर्ट के इतिहास का काला दिन करार दिया।

By Abhimanyu 
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Codeine Syrup Scandal : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोडीन युक्त कफ सिरप मामले के मुख्य आरोपी भोला जायसवाल समेत 75 आरोपियों की जमानत याचिकाओं की सुनवाई कर रही एकल पीठ के न्यायाधीश कृष्ण पहल ने खुद को इस मामले से अलग कर लिया है। उन्होंने सुनवाई के दौरान तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायाधीश तक पहुंच बनाने या लंबित मामले को प्रभावित करने का कोई भी प्रयास न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला है। इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद जज ने कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे हाईकोर्ट के इतिहास का काला दिन करार दिया।

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दरअसल, कथित तौर पर फैसला सुरक्षित रखने से पहले वादकारी पक्ष की ओर से पीठासीन न्यायाधीश तक निजी माध्यमों से संपर्क साधने का प्रयास किया गया था। न्यायाधीश कृष्ण पहल ने न्यायपालिका की निष्पक्षता और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सभी याचिकाओं को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजकर किसी अन्य पीठ को सौंपने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने आदेश में कहा कि न्याय व्यवस्था की पूरी नींव इस विश्वास पर टिकी है कि न्याय निष्पक्ष, निर्भीक और किसी भी बाहरी प्रभाव से मुक्त होकर दिया जाता है। अगर कोई पक्षकार या उससे जुड़ा व्यक्ति न्यायाधीश तक पहुंचने या निजी तौर पर संपर्क स्थापित करने का प्रयास करता है तो यह न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता और कानून के शासन पर सीधा प्रहार है।

कोर्ट ने कहा कि फैसला सुरक्षित रखने से पहले न्यायाधीश तक निजी पहुंच बनाने की कोशिश न्यायिक व्यवस्था की गरिमा पर गंभीर आघात है। न्यायमूर्ति ने स्पष्ट किया कि अगर ऐसे में फैसला किसी के पक्ष में आता है, तो निष्पक्षता पर अनावश्यक संदेह पैदा हो सकता है। न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि निष्पक्ष रूप से होता हुआ दिखना भी चाहिए। कोर्ट ने आदेश दिया कि सभी जमानत याचिकाएं और उससे संबद्ध अन्य मामलों को किसी अन्य पीठ के समक्ष 7 अगस्त 2026 को सूचीबद्ध किया जाए।

बता दें कि इस मामले में सभी आरोपियों ने पहले प्राथमिकी रद्द कराने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट और लखनऊ खंडपीठ का रुख किया था, लेकिन सभी याचिकाएं खारिज हो गई थीं। फिर कोर्ट ने अग्रिम जमानत की मांग भी ठुकरा दी थी। अब गिरफ्तार आरोपियों की नियमित जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान जज को प्रभावित करने का मामला बेहद चौंकाने वाला है, जहां आरोपियों ने दुस्साहस दिखाते हुए न्यायाधीश तक पहुंच बनाने का प्रयास किया है।

इस मामले में संलिप्त राजनेताओं और अफसरों पर आज तक कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हो सकी। एसआईटी ने थोक कारोबारियों, दवा कंपनियों व फुटकर दुकानदारों पर तो कानूनी शिकंजा कसा, लेकिन मुख्य आरोपियों की मदद करने वाले सफेदपोश बचते रहे। दुबई में छिपे मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल के प्रत्यर्पण की कवायद तेज नहीं हुई है, जबकि उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी हुआ है। उसके पिता भोला प्रसाद की जमानत अर्जी पर न्यायमूर्ति कृष्ण पहल की एकलपीठ सुनवाई कर रही थी। एसटीएफ ने बीते दिनों 12 आरोपियों के खिलाफ 40 हजार पन्नों का आरोप पत्र दाखिल किया था।

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