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यूपी में ब्राह्मण फिर निशाने पर, BHU की परीक्षा में पूछा गया विवादित सवाल, ब्राह्मणवादी पितृसत्ता ने महिलाओं के विकास में बाधा डाली?

By संतोष सिंह 
Updated Date

लखनऊ। वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में आयोजित एमए इतिहास की सेमेस्टर परीक्षा का एक सवाल अब विवाद का कारण बन गया है। सोशल साइंस फैकल्टी के इतिहास विभाग की परीक्षा में छात्रों से पूछा गया कि ब्राह्मणवादी पितृसत्ता ने प्राचीन भारत में महिलाओं की प्रगति में किस तरह बाधा डाली? सवाल सामने आते ही कैंपस से लेकर सोशल मीडिया तक बहस शुरू हो गई। कुछ लोग इसे अकादमिक चर्चा का हिस्सा बता रहे हैं तो कुछ इसे आपत्तिजनक मान रहे हैं। फिलहाल इस पूरे विवाद पर BHU की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

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एमए इतिहास के पेपर में पूछा गया विवादित सवाल

यह मामला BHU के एमए इतिहास चौथे सेमेस्टर की परीक्षा से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक आधुनिक भारत और महिलाएं विषय के चौथे प्रश्न पत्र में यह सवाल पूछा गया था। प्रश्न में छात्रों से पूछा गया कि ब्राह्मणवादी पितृसत्ता ने प्राचीन भारत में महिलाओं की प्रगति में किस तरह रुकावट पैदा की। परीक्षा सोशल साइंस फैकल्टी के इतिहास विभाग की ओर से आयोजित की गई थी।

सवाल सामने आते ही शुरू हुई बहस

परीक्षा खत्म होने के बाद यह सवाल तेजी से चर्चा में आ गया। सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे इतिहास और जेंडर स्टडीज से जुड़ा सामान्य अकादमिक सवाल बता रहे हैं, जबकि कई लोगों ने सवाल की भाषा और विषय पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इस तरह के सवाल धार्मिक और सामाजिक भावनाओं को प्रभावित कर सकते हैं।

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छात्रों के बीच भी चर्चा का विषय बना मामला

BHU कैंपस में भी यह सवाल छात्रों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है। कई छात्र इसे विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम और शोध आधारित अध्ययन का हिस्सा बता रहे हैं, जबकि कुछ छात्रों का कहना है कि सवाल को अलग तरीके से भी पूछा जा सकता था। इतिहास और समाजशास्त्र जैसे विषयों में महिलाओं की स्थिति, सामाजिक ढांचे और पितृसत्ता पर लंबे समय से अकादमिक बहस होती रही है। इसी वजह से यह प्रश्न अब व्यापक चर्चा का मुद्दा बन गया है।

अभी तक BHU की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं

फिलहाल इस पूरे विवाद पर BHU प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विश्वविद्यालय ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि सवाल पाठ्यक्रम के किस हिस्से के तहत पूछा गया था और इस पर उठ रहे विवाद को लेकर उसकी क्या राय है? हालांकि मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है और आने वाले समय में विश्वविद्यालय की ओर से प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है।

वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) की एमए इतिहास परीक्षा में पूछे गए प्रश्न को लेकर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक आपत्ति जताई जा रही है। हालांकि इस मामले में काशी हिंदू विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि ऐसा कोई विषय उनके संज्ञान में नहीं आया है और इतिहासकार भी कुछ कहने से बचते नजर आ रहे हैं। अब सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चाओं का दौर इसलिए भी तेज है क्योंकि बीते दिनों उत्तर प्रदेश से लेकर देश की राजनीति में कुछ ऐसे ही प्रश्न और फिल्मों के टाइटल को लेकर ब्राह्मणवाद और पंडित शब्द पर दो खेमे में लोग बटते नजर आए और अब भारत के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रश्न पत्र में ऐसे सवाल भी इस चर्चा को और बढ़ावा दे रहे हैं।

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अभी संज्ञान में नहीं है ऐसा कोई मामला : प्रशासन

जब इस मामले को लेकर काशी हिंदू विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी से बातचीत की तो उनका कहना है कि ऐसा कोई भी विषय उनके संज्ञान में नहीं है, और जाति सूचक टिप्पणी को लेकर कुछ भी बात नहीं है। इसके अलावा विश्वविद्यालय से जुड़े इतिहासकार भी इस मामले पर कुछ भी कहने से बचते नजर आ रहे हैं। जबकि कांग्रेस पार्टी ने अब इसको लेकर सवाल खड़ा किया है। उनका कहना है कि विवादित प्रश्न है और यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है।

मदनमोहन मालवीय के सपनों वाले संस्थान को अब विचारधारा की प्रयोगशाला बना दिया : अखिलेश यादव

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने वाराणसी हिन्दू यूनिवर्सिटी (BHU)  के विवादित प्रश्न को लेकर बीजेपी सरकार पर जोरदार हमला बोला है।  कहा कि अब सवाल भी ऐसे पूछे जा रहे हैं जिनका जवाब परीक्षा हॉल से ज्यादा टीवी डिबेट में तलाशा जा रहा है। अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने तंज कसते हुए कहा कि बीएचयू (BHU)  जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में टेढ़े-मेढ़े सवाल आना कोई संयोग नहीं बल्कि सोची-समझी रणनीति है। उनका आरोप था कि पहले माहौल बनाया जाता है, फिर विवाद पैदा होता है और आखिर में सवाल जनता से पूछा जाता है कि देश खतरे में है या नहीं? उन्होंने कहा कि मदनमोहन मालवीय के सपनों वाले संस्थान को अब विचारधारा की प्रयोगशाला बना दिया गया है।

बीएचयू (BHU) के प्रश्नपत्र में “ब्राह्मणवादी पितृसत्ता” से जुड़े सवाल पर मचे बवाल को लेकर अखिलेश ने बीजेपी (BJP) पर निशाना साधते हुए कहा कि अब परीक्षा कम और सामाजिक समीकरणों की प्रैक्टिकल क्लास ज्यादा चल रही है। उधर ब्राह्मण महासभा इसे समाज विशेष का अपमान बता रही है, जबकि राजनीतिक दल इसे अपने-अपने चश्मे से देख रहे हैं। कुल मिलाकर सवाल एक था, लेकिन जवाबों में पूरी राजनीति उतर आई। अखिलेश बोले कि लाखों छात्रों और उनके परिवारों का भविष्य दांव पर लग गया, लेकिन सरकार की चिंता सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित दिखती है।

 

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