समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने वाराणसी हिन्दू यूनिवर्सिटी (BHU) के विवादित प्रश्न को लेकर बीजेपी सरकार पर जोरदार हमला बोला है। कहा कि अब सवाल भी ऐसे पूछे जा रहे हैं जिनका जवाब परीक्षा हॉल से ज्यादा टीवी डिबेट में तलाशा जा रहा है। अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने तंज कसते हुए कहा कि बीएचयू (BHU) जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में टेढ़े-मेढ़े सवाल आना कोई संयोग नहीं बल्कि सोची-समझी रणनीति है।
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने वाराणसी हिन्दू यूनिवर्सिटी (BHU) के विवादित प्रश्न को लेकर बीजेपी सरकार पर जोरदार हमला बोला है। कहा कि अब सवाल भी ऐसे पूछे जा रहे हैं जिनका जवाब परीक्षा हॉल से ज्यादा टीवी डिबेट में तलाशा जा रहा है। अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने तंज कसते हुए कहा कि बीएचयू (BHU) जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में टेढ़े-मेढ़े सवाल आना कोई संयोग नहीं बल्कि सोची-समझी रणनीति है। उनका आरोप था कि पहले माहौल बनाया जाता है, फिर विवाद पैदा होता है और आखिर में सवाल जनता से पूछा जाता है कि देश खतरे में है या नहीं? उन्होंने कहा कि मदनमोहन मालवीय के सपनों वाले संस्थान को अब विचारधारा की प्रयोगशाला बना दिया गया है।
बीएचयू (BHU) के प्रश्नपत्र में “ब्राह्मणवादी पितृसत्ता” से जुड़े सवाल पर मचे बवाल को लेकर अखिलेश ने बीजेपी (BJP) पर निशाना साधते हुए कहा कि अब परीक्षा कम और सामाजिक समीकरणों की प्रैक्टिकल क्लास ज्यादा चल रही है। उधर ब्राह्मण महासभा इसे समाज विशेष का अपमान बता रही है, जबकि राजनीतिक दल इसे अपने-अपने चश्मे से देख रहे हैं। कुल मिलाकर सवाल एक था, लेकिन जवाबों में पूरी राजनीति उतर आई। नीट पेपर लीक पर भी सपा प्रमुख ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि अब NEET का मतलब National Eligibility cum Entrance Test कम और ‘Nationally Engineered Exam Leak Test’ ज्यादा लगने लगा है। अखिलेश बोले कि लाखों छात्रों और उनके परिवारों का भविष्य दांव पर लग गया, लेकिन सरकार की चिंता सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित दिखती है।
महंगाई पर हमला बोलते हुए उन्होंने पूछा कि गैस सिलेंडर, पेट्रोल और डीजल आखिर किस उपलब्धि के तहत महंगे किए जा रहे हैं। उन्होंने कटाक्ष किया कि “जनता की जेब हल्की होती जा रही है और सरकार उपलब्धियों का वजन बढ़ाती जा रही है।रुपये की गिरती कीमत पर भी अखिलेश ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि रुपया अब विकास की सीढ़ी नहीं, पाताल लोक की लिफ्ट पकड़ चुका है। उन्होंने सरकार से पूछा कि आखिर रुपये की गिरावट का ‘अमृतकालीन लक्ष्य’ क्या है। फिलहाल देश में राजनीति ऐसी स्थिति में पहुंच चुकी है जहां परीक्षा का प्रश्नपत्र, पेट्रोल का दाम और रुपये का भाव तीनों विपक्ष के लिए मुद्दा हैं और सरकार के लिए परिस्थितियां। जनता अब सिर्फ यही समझने की कोशिश कर रही है कि अगला विवाद किस विभाग से निकलकर आने वाला है।