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Groundwater Turns Toxic : CSIR-IITR की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा, वाराणसी, उन्नाव, अमरोहा समेत पूर्वी यूपी के पानी में मिला यूरेनियम

By संतोष सिंह 
Updated Date

अलीगढ़। यूपी में भूजल की गुणवत्ता पर CSIR-IITR की रिपोर्ट में चौंकाने वाले ताजा आंकड़े गंभीर चेतावनी दे रहे हैं। प्रदेश के कई जिलों में पीने के पानी में फ्लोराइड, आर्सेनिक, नाइट्रेट और यहां तक कि यूरेनियम (Uranium)  जैसे तत्व निर्धारित मानकों से अधिक पाए गए हैं। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) और भारतीय विष विज्ञान संस्थान अनुसंधान (IITR) की रिपोर्ट के अनुसार, अलीगढ़ सहित 11 जिलों में लवणता, 24 जिलों में फ्लोराइड और 14 जिलों में आर्सेनिक की मात्रा मानक से अधिक दर्ज की गई है।

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वाराणसी, सोनभद्र, अमरोहा और उन्नाव समेत 22 जिलों में यूरेनियम  के अंश मिलने से स्थिति और हो गई गंभीर

वहीं वाराणसी, सोनभद्र, अमरोहा और उन्नाव समेत 22 जिलों में यूरेनियम (Uranium) के अंश मिलने से स्थिति और गंभीर हो गई है। रिपोर्ट बताती है कि 48 जिलों में नाइट्रेट और 46 जिलों में आयरन की अधिकता दर्ज की गई है, जबकि 26 जिलों में मैगनीज भी मानक से ऊपर पाया गया। बदायूं और चंदौली में सीसा भी सीमा के करीब पहुंच गया है। संसद में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह (Dr. Jitendra Singh, Minister of State (Independent Charge) for Science & Technology and Earth Sciences) ने लोकसभा में राज्य के भूजल की वास्तविक समय निगरानी और प्रबंधन से जुड़ी रिपोर्ट पेश की है।

भूजल बढ़ा, लेकिन सुरक्षित नहीं

केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में कुल वार्षिक भूजल पुनर्भरण 2017 के 69.92 अरब घन मीटर से बढ़कर 2025 में 73.39 अरब घन मीटर हो गया है। इसके बावजूद भूजल दोहन की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। 2017 में 70.18 फीसदी के मुकाबले 2025 में भूजल उपयोग 70 फीसदी पर है। यानी पानी बढ़ा जरूर है, लेकिन उसकी गुणवत्ता और सुरक्षित उपलब्धता पर सवाल खड़े हैं।

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अलीगढ़ में स्थिति ज्यादा संवेदनशील

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (Aligarh Muslim University) के भूगोल विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अहमद मुज्तबा सिद्दीकी (Dr. Ahmed Mujtaba Siddiqui, Assistant Professor, Department of Geography) ने बताया कि जलवायु परिवर्तन, औद्योगिक अपशिष्ट और भारी धातुएं भूजल को तेजी से दूषित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ के पानी में कई तत्वों के साथ जिंक की मात्रा भी बढ़ी है। अगर अभी से प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो 2050 तक शुद्ध पेयजल का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।

औद्योगिक क्षेत्रों के पास बढ़ रहा दबाव

सीएसआईआर-नीरी (CSIR-NEERI) के मूल्यांकन में मेरठ, अलीगढ़, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, आगरा और मथुरा के औद्योगिक क्षेत्रों के पास भूजल के नमूनों की जांच की गई। यमुना और हिंडन नदी के किनारे लिए गए बोरवेल नमूनों में भारी धातुओं की मौजूदगी दर्ज की गई, हालांकि ये बीआईएस मानकों (BIS Standards) के भीतर पाई गई। इसके बावजूद विशेषज्ञ मानते हैं कि औद्योगिक अपशिष्ट और शहरी विस्तार का दबाव लगातार भूजल की गुणवत्ता (Groundwater Quality) को प्रभावित कर रहा है।

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