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VIDEO: महिला की मौत के बाद चार कंधा तक नहीं हुआ नसीब, शव के अंतिम संस्कार के लिए मिन्नते करती रही बेटियों, रिश्तेदार और पड़ोसी बनाए रहे दूरी

By Satish Singh 
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पटना। बिहार के छपरा जिले से एक इंसानियत को शर्मशार कर देने वाली घटना सामने आई है। यहां पर एक महिला की मौत के बाद शव का अंतिम संस्कार के लिए घाट तक ले जाने के लिए चार कंधे तक नसीब नहीं हो रहे थे। घंटो तक मृतका की दोनों बेटियां पड़ोसियों और रिश्तेदारों से मदद मांगती रही, लेकिन कोई भी उनकी मदद करने के लिए आगे नहीं आया। अंत में दोनों बेटियों ने थक हार कर मां के शव को खुद कंधे पर लेकर घाट पर पहुंची और उनका अंतिम संस्कार किया। लगभग दो साल पहले ही पिता की मौत हो चुंकी है और अब घर में आए का कोई साधन नहीं है। दोनों बेटियां गरिबी से जूझ रही है। वहीं इस पूरे घटना क्रम का वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। में दोनों बेटियों ने करने के लिए चार

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बिहार के छपरा जनपद से मढ़ौरा ब्लॉक के जवैनिया गांव निवासी बबीता देवी पत्नी स्वग्रीय रविंद्र सिंह कुछ दिनों पहले बिमारी के कारण मौत हो गई थी। घर में सिर्फ उनकी दो बेटियां है और उनकी मॉली हालत बहुत ही खराब है। मां की मौत के बाद दोनों बेटियां अंतिम संस्कार के लिए पड़ोसियों और रिश्तेदारों से घंटों तक हाथ जोड़ कर मिन्नत करती रहीख् लेकिन कोई भी उनकी मदद करने के लिए आगे नहीं आया। इस दौरान पूरे गांव में सन्नाटा फैला रहा। कोई भी शव को अंतिम संस्कार के लिए घाट तक पहुंचाने के लिए आगे नहीं आया। दोनों बेटियों की काफी मशक्कत के बाद गांव के ही दो—तीन लोग और बेटियों की मां की अंतिम संस्कार करने में मदद की। इस दौरान शव को घाट तक पहुंचाने के लिए चार कंधे भी नही आए तो दोनों बेटियों ने खुद दो लोगों की मदद से अपनी मां के शव को कंधा दिया और घाट तक ले गई। घाट पर बेटियों ने ही मां के शव को मुखाअग्नि दी।

पड़ोसियों ने बताया परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है। मृतका के पति रविंद्र सिंह की डेढ़ साल पहले मौत हो गई थी। पति की मौत के बाद परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। पिता की मौत​ के बाद घर में कमाने वाला कोई नहीं बचा था। अब मां की मौत के बाद घर में सिर्फ दो बेटियां ही बची हैं। ग्रामीणों ने बताया कि यह परिवार बहुत गरीब था। पूरा परिवार धीरे-धीरे समाज से अलग-थलग हो गया था। यही वजह है कि मां की मौत के बाद भी कोई आगे नहीं आया।

वहीं बेटियों ने बताया कि मां के शव का अंतिम संस्कार तो कर दिया, लेकिन उनकी तेरहवीं करने के लिए पैसे नहीं है और न ही कोई और रास्ता है। दोनों बेटियां ने समाज और प्रशासन से मदद की गुहार लगाई हैं। बेटियों की मांग है कि अगर उन्हें कोई मदद मिलती है, तो वे अपनी मां की तेरहवी और अंतिम संस्कार की रस्में ठीक से कर पाएंगी, जिससे मां की आत्मा को शांति मिल सके।

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