लखनऊ : यूपी की राजधानी में लंबे समय तक डीएम रहे चर्चित IAS अभिषेक प्रकाश को भ्रष्टाचार के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया है। वह वर्तमान में इन्वेस्ट यूपी के सीईओ पद पर तैनात थे। आईएएस अभिषेक पर सोलर एनर्जी से जुड़े कल-पुर्जे बनाने वाली कंपनी को यूनिट स्थापित करने की अनुमति देने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है। आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश के निलंबन ने उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
ब्यूरोक्रेसी पर तरह तरह के उठ रहे सवाल अब चर्चा का विषय बने हुए है। विपक्ष भी लगातार हमले कर रहा है। हालांकि, इस मामले में जांच अभी जारी है और रोज नई नई बातें सामने आ रही है।
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जिस सोलर कम्पनी SAEL P6 Pvt Ltd की शिकायत पर IAS अभिषेक प्रकाश पर एक्शन हुआ है उसके बोर्ड में एक नाम है हरियाणा कैडर 1980 बैच के रिटायर IAS अशोक लवासा। अशोक लवासा मोदी सरकार में केंद्र में वित्त सचिव,नागरिक उड्डयन, पर्यावरण और वन विभाग जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय संभालते रहें हैं।
निलंबित IAS अभिषेक प्रकाश के खिलाफ सीएम योगी आदेश के बाद विजिलेंस विभाग ने “खुली जांच” का आदेश जारी कर दिया है।
IAS अभिषेक प्रकाश के खिलाफ सीएम योगी के सख्त एक्शन से ब्यूरोक्रेसी में भूचाल आया हुआ है। भ्रष्टाचार के आरोपों में जीरो टॉलरेंस नीति को अपनाते हुए योगी सरकार ने पहले कार्यकाल से लेकर अब तक 11 अफसरों को सस्पेंड कर चुकी है।
सूत्रों के मुताबिक, इस निवेश प्रस्ताव की फाइल एक उच्च अधिकारी के पास पहुंचने के बाद अटक गई और जब तक 400 करोड़ रुपये की ‘मांग’ पूरी नहीं होती, तब तक इसे मंजूरी नहीं देने की बात कही गई।
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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव कहा था कि हाल ही में निलंबित किए गए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश (IAS officer Abhishek Prakash) के खिलाफ यह कार्रवाई कमीशन मांगने की वजह से नहीं बल्कि बेईमानी की रकम के ‘बंटवारे के झगड़े’ की वजह से हुई है।
सौर ऊर्जा से जुड़े कलपुर्जे बनाने वाली कंपनी एसएफएल सोलर प्राइवेट लिमिटेड ने 8000 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया था, लेकिन इस परियोजना में 5 फीसदी कमीशन यानी 400 करोड़ रुपये की मांग की गई, जिससे पूरा मामला विवादों में आ गया । भ्रष्टाचार मामले में सीएम योगी (CM Yogi) ने गुरुवार को बड़ा एक्शन एक्शन लेते हुए 2006 बैच के आईएएस सचिव औद्योगिक विकास विभाग व इन्वेस्ट यूपी के CEO अभिषेक प्रकाश (CEO of Invest UP Abhishek Prakash) को निलंबित कर दिया है। अब यह सवाल उठता है कि क्या इस कमीशन के खेल में सिर्फ आईएएस अभिषेक प्रकाश ही दोषी हैं या और भी नाम समने आएंगे?
एसएफएल सोलर की योजना
एसएफएल सोलर कंपनी ग्रेटर नोएडा में सोलर बैटरी और अन्य सौर उपकरणों का प्लांट लगाना चाहती थी। कंपनी ने इसके लिए औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) को ऑनलाइन आवेदन दिया था। इस प्रस्ताव के तहत कंपनी ने ग्रेटर नोएडा में बड़ी जमीन की मांग रखी थी।
सूत्र बताते हैं कि कंपनी के आवेदन को बार-बार टाला गया, और जब उच्च अधिकारियों के पास यह फाइल पहुंची, तो 400 करोड़ रुपये की डिमांड सामने आई। एसएफएल सोलर की कुल नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता 6500 मेगावाट बताई जाती है। कंपनी पहले भी यूपी में निवेश कर चुकी है, लेकिन इतनी बड़ी परियोजना को लेकर शासन में अनिश्चितता बनी हुई थी।