नई दिल्ली। एलारा सिक्योरिटीज (Elara Securities) की एक रिपोर्ट के मुताबिक हाल के महीनों में भारत के निर्यात बाजार में टैरिफ के बाद स्पष्ट रूप से पुनर्संतुलन (rebalancing) दिख रहा है। देश ने अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम की है और अन्य भौगोलिक क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति बढ़ाई है। रिपोर्ट के अनुसार भारत के निर्यात बाजार (export market) की संरचना अमेरिका (America) पर अत्यधिक निर्भरता से हटकर पश्चिम एशिया, एशिया और चुनिंदा उभरते बाजारों में अधिक भौगोलिक विविधीकरण की ओर एक रणनीतिक बदलाव को दर्शाती है।
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रिपोर्टा के मुताबिक भारत के निर्यात बाजार की संरचना भी टैरिफ के बाद स्पष्ट पुनर्संतुलन को दर्शाती है। भारत अमेरिका पर अत्यधिक निर्भरता से हटकर पश्चिम एशिया, एशिया और चुनिंदा उभरते बाजारों में अधिक भौगोलिक विविधीकरण की ओर है। भारत के निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी टैरिफ से पहले की अवधि में 22.5 प्रतिशत से घटकर टैरिफ के बाद की अवधि में 17.8 प्रतिशत हो गई। इसके विपरीत, यूएई, चीन, सऊदी अरब, स्पेन और हांगकांग जैसे बाजारों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो भारतीय निर्यातकों द्वारा प्रभावी व्यापार पुनर्निर्देशन और बाजार प्रतिस्थापन का संकेत देता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पारंपरिक यूरोपीय व्यापार भागीदारों ने मोटे तौर पर स्थिर हिस्सेदारी बनाए रखी। जर्मनी, इटली और स्पेन जैसे देशों में मामूली वृद्धि ने नीदरलैंड और यूके में देखी गई कमी को पूरा करने में मदद की। एलारा सिक्योरिटीज ने कहा कि यह प्रवृत्ति वैश्विक अनिश्चितताओं और टैरिफ से संबंधित चुनौतियों के बावजूद भारत के निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र के लचीलेपन को उजागर करती है। रिपोर्ट में FY27E तक निर्यात में लचीलापन जारी रहने की उम्मीद है। FY27E में माल निर्यात में 4.5-5 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है, जबकि FY26E में अनुमानित वृद्धि दो प्रतिशत थी। सेवाओं के निर्यात में भी लचीलापन बने रहने की उम्मीद है, जो GCC अर्थव्यवस्थाओं में चल रहे उछाल से समर्थित है। टैरिफ की बाधाओं और वैश्विक मांग में अस्थिरता के बावजूद भारत के माल निर्यात में लचीलापन दिखाया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि यह प्रदर्शन गैर-टैरिफ और उच्च मूल्य वर्धित क्षेत्रों में निरंतर मजबूती से समर्थित रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, ऑर्गेनिक रसायन और इंजीनियरिंग सामान निर्यात प्रदर्शन को बनाए हुए हैं, जिनकी संयुक्त हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है।