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India-US Trade Deal : व्हाइट हाउस ने अमेरिकी कामगारों और व्यवसायों के लिए ‘बड़ी जीत’ करार दिया, जानें भारत को क्या होगा नुकसान?

By संतोष सिंह 
Updated Date

नई दिल्ली। भारत-अमेरिका ट्रेड डील (India-US Trade Deal) का व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलाइन लेविट (White House spokesperson Caroline Leavitt) ने इसे अमेरिकी कामगारों और व्यवसायों के लिए ‘बड़ी जीत’ करार दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता मुख्य रूप से अमेरिका के हित में है। डील भारत को कुछ रियायतें मिली हैं लेकिन लंबे समय में नुकसान भी हो सकता है। हालांकि, इस समझौते के तहत भारत को रूसी तेल खरीद बंद और अमेरिकी उत्पादों पर टैक्स शून्य करने जैसे कदम उठाने पड़ सकते हैं, जिससे भारत की ऊर्जा लागत बढ़ सकती है और कृषि क्षेत्र पर दबाव पड़ सकता है।

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व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलाइन लेविट (White House spokesperson Caroline Leavitt) ने कहा कि इस समझौते से अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारत के विशाल बाजार में अधिक पहुंच मिलेगी, जिससे अमेरिकी किसानों की आय बढ़ेगी। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने कहा कि समझौता भारत के औद्योगिक क्षेत्र को काफी खोलेगा, जहां शुल्क 13.5 प्रतिशत से घटाकर शून्य प्रतिशत किया जाएगा।

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अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के प्रमुख सदस्यों जैसे चक शूमर या मिच मैककॉनेल से इशारों में खुशी जताई। लेकिन अमेरिकी व्यापार संगठनों ने इसे अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद माना है। अमेरिकी कृषि मंत्री ब्रूक रोलिन्स (US Agriculture Secretary Brooke Rollins) ने पहले कहा था कि समझौता अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारत में अधिक पहुंच देगा, जिससे 2024 में 1.3 अरब डॉलर का व्यापार घाटा कम होगा।

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यूएस के व्यापार प्रतिनिधि ने सीएनबीसी पर कहा कि भारत अमेरिका के औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 0% कर देगा। भारत के साथ हुए इस ऐतिहासिक समझौते से अमेरिकी किसानों और उत्पादकों को अभूतपूर्व बाजार पहुंच प्राप्त होगी।

अमेरिकी कृषि सचिव ब्रूक रॉलिन्स ने कहा कि यह डील अमेरिकी फार्म प्रोडक्ट्स को भारत के बड़े बाजार में ज्यादा निर्यात करने देगी, जिससे अमेरिकी किसानों की कमाई बढ़ेगी

अमेरिकी कृषि सचिव ब्रूक रॉलिन्स (US Agriculture Secretary Brooke Rollins) ने कहा कि यह डील अमेरिकी फार्म प्रोडक्ट्स को भारत के बड़े बाजार में ज्यादा निर्यात करने देगी, जिससे अमेरिकी किसानों की कमाई बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि अमेरिका का भारत के साथ कृषि व्यापार घाटा 1.3 अरब डॉलर है और भारत की बढ़ती आबादी अमेरिकी उत्पादों के लिए बड़ा बाजार है।

अमेरिकी मीडिया का क्या रुख?

अमेरिकी मीडिया आउटलेट ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ‘मोदी के लिए कृषि से जुड़ी रियायतें अक्सर समस्या साबित हुई हैं और भारत का कृषि क्षेत्र काफ़ी हद तक संरक्षित है। किसी भी पक्ष ने यह नहीं कहा है कि क्या भारत इन बाधाओं को कम करेगा। इसने लिखा है, ‘भारत आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों पर भी सख्त प्रतिबंध बनाए रखता है जबकि अमेरिका में मक्का और सोयाबीन का अधिकांश उत्पादन ऐसी ही फसलों पर आधारित है। बातचीत के दौरान वॉशिंगटन ने आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों के लिए अधिक पहुंच के साथ-साथ अपने डेयरी उत्पादों के प्रवेश पर भी ज़ोर दिया लेकिन भारत शायद ही इसे स्वीकार करे।’

किसकी बड़ी जीत ?

अधिकांश अमेरिकी स्रोतों और विश्लेषकों के अनुसार, यह समझौता मुख्य रूप से अमेरिका की जीत है। ट्रंप ने इसे ‘लंबे समय से प्रतीक्षित’ करार दिया, जहां अमेरिका को 500 अरब डॉलर से अधिक के ऑर्डर मिलेंगे, रूसी तेल पर निर्भरता कम होगी और भारत का बाजार अमेरिकी उत्पादों के लिए खुल जाएगा। अटलांटिक काउंसिल के विशेषज्ञ माइकल कुगेलमैन और मार्क लिनस्कॉट ने कहा कि यह समझौता अमेरिका-भारत संबंधों में तनाव कम करेगा और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, जबकि भारत को भारी टैक्स से राहत मिलेगी लेकिन यह पहले की स्थिति से बेहतर नहीं है। अमेरिकी नज़रिए से, भारत का रूसी तेल बंद करना यूक्रेन युद्ध को प्रभावित करेगा और अमेरिकी ऊर्जा निर्यात बढ़ेगा।

भारत को क्या नुकसान?

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विश्लेषकों के अनुसार, भारत को कई मोर्चों पर नुकसान हो सकता है। सबसे बड़ा नुकसान रूसी तेल खरीद बंद करने से होगा, जो सस्ता था और अब अमेरिकी या वेनेजुएला तेल महंगा पड़ेगा, जिससे ऊर्जा लागत बढ़ेगी और महंगाई पर असर पड़ेगा। समझौते में भारत को अमेरिकी सामानों पर शुल्क शून्य करने पड़ेंगे, जबकि अमेरिका 18 प्रतिशत शुल्क रखेगा, जिससे भारतीय निर्यातकों को नुकसान पहुंचा सकता है।

कृषि क्षेत्र की चिन्ता

कृषि क्षेत्र में चिंता है कि अमेरिकी सब्सिडी वाले उत्पाद जैसे मक्का, सोयाबीन और गेहूं भारत में डंपिंग कर सकते हैं, जिससे भारतीय किसानों की आय घटेगी। सेफ फूड अलायंस के सदस्य अनंतू ने कहा, “अगर ये उत्पाद भारत में आएंगे, तो यह हमारे किसानों, स्वास्थ्य, पारिस्थितिकी और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाएगा।” हालांकि, भारत ने संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित रखा है, लेकिन दबाव बरकरार है। विदेश मामलों के विशेषज्ञ रोबिंदर सचदेव ने कहा कि भारी टैक्स जारी रहते तो भारत को 50 अरब डॉलर का निर्यात नुकसान और 35-50 लाख नौकरियां जातीं, लेकिन अब भी ऊर्जा निर्भरता में बदलाव से नुकसान होगा।

समझौते की पूरी जानकारी अभी भी ठीक से सामने नहीं आई है, लेकिन अमेरिकी स्रोतों से लगता है कि यह अमेरिका की रणनीतिक जीत है, जबकि भारत को व्यापार संतुलन और ऊर्जा सुरक्षा में चुनौतियां मिल सकती हैं। दोनों देश इस पर संयुक्त बयान जारी कर सकते हैं।

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