Advertisement
  1. हिन्दी समाचार
  2. एस्ट्रोलोजी
  3. New Hindu Code : काशी विद्वत परिषद ने जारी की नई हिंदू आचार संहिता, दहेज प्रथा, भव्य शादियों और धर्मांतरण पर लगेगा अंकुश

New Hindu Code : काशी विद्वत परिषद ने जारी की नई हिंदू आचार संहिता, दहेज प्रथा, भव्य शादियों और धर्मांतरण पर लगेगा अंकुश

By santosh singh 
Updated Date

Indian Dowry Laws 2025 : काशी विद्वत परिषद (Kashi Vidvat Parishad) ने हिंदू परंपराओं और सामाजिक व्यवहार में सुधार के लिए एक नई हिंदू आचार संहिता (New Hindu code of Conduct) जारी की है। 400 पन्नों के इस दस्तावेज को देश भर के विद्वानों, शंकराचार्यों, महामंडलेश्वरों और संतों के साथ लंबे विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। नई संहिता में दहेज पर पूर्ण प्रतिबंध, शादियों में फिजूलखर्ची पर रोक और दिन में वैदिक तरीके से विवाह करने की सलाह दी गई है।

पढ़ें :- Chaturmas 2026 :  25 जुलाई को योग निद्रा में जाएंगे श्री हरि , जानें नियमों के बारे में

ब्रह्मभोज में सिर्फ 13 लोग होंगे शामिल

अंतिम संस्कार के बाद होने वाले भोज में केवल 13 लोगों को शामिल करने की सीमा तय की गई है। इसके साथ ही प्री-वेडिंग शूट और सगाई जैसी आधुनिक प्रथाओं को भी हतोत्साहित किया गया है। संहिता में हिंदू धर्म में वापसी की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।

जिन लोगों ने किसी दबाव में धर्म परिवर्तन कर लिया था, वे लोग अपने गोत्र और नाम सहित हिंदू धर्म में वापस लौट सकेंगे। इसके साथ ही मंदिरों की पवित्रता बनाए रखने के लिए मंदिरों के गर्भगृह में केवल पुजारियों और संतों के प्रवेश की अनुमति होगी।

अक्तूबर 2025 में होगी लागू

पढ़ें :- Bankipur by-Election : प्रशांत किशोर को समर्थन का कांग्रेस ने चला बड़ा दांव! BJP को कांटे की टक्कर देने की तैयारी

काशी विद्वत परिषद के महासचिव (General Secretary of Kashi Vidvat Parishad) राम नारायण द्विवेदी (Ram Narayan Dwivedi)  ने बताया कि इस संहिता को 70 विद्वानों द्वारा विकसित किया गया है। ये विद्वान 11 टीमों और तीन उप-टीमों में विभाजित थे। प्रत्येक टीम में उत्तरी और दक्षिणी भारत के पांच विद्वान शामिल थे। संहिता को अंतिम रूप देने के लिए 40 से ज्यादा बैठकें आयोजित की गईं। उन्होंने बताया कि इस संहिता की 5 लाख प्रतियां पूरे देश में बांटी जाएंगी।

इस संहिता को तैयार करने में मनुस्मृति (Manu Smriti) , पराशर स्मृति (Parashar Smriti), देवल स्मृति (Deval Smriti) के साथ-साथ गीता, रामायण, महाभारत (Mahabharata) और पुराणों के अंशों को शामिल किया गया है। अक्टूबर 2025 में शंकराचार्यों, रामानुजाचार्यों और प्रमुख संतों की स्वीकृति के बाद इस संहिता को आधिकारिक तौर पर लागू किया जाएगा।

Advertisement