कानपुर: कानपुर प्राणी उद्यान से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बेहद सुखद खबर सामने आई है। जू में पूरे 12 साल बाद घड़ियालों की पहली सफल ब्रीडिंग हुई है, जिसके बाद जू में एक साथ 15 नन्हे घड़ियालों का जन्म हुआ है। साल 2017 में रेस्क्यू कर लाए गए घड़ियाल के जोड़े ने करीब दो महीने पहले अंडे दिए थे, जिनसे अब बच्चे बाहर आ गए हैं। इस खुशखबरी के बाद चिड़ियाघर में घड़ियालों का कुनबा बढ़कर अब 17 हो गया है।
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एक की मौत के बाद अनोखे फैसले से मिली कामयाबी
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक मार्च की शुरुआत में यहाँ तीन घड़ियाल थे, लेकिन आपसी लड़ाई में घायल होने के कारण दो महीने पहले एक मादा घड़ियाल की मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम के दौरान उसके पेट से अंडे मिलने के बाद जू के डायरेक्टर डॉ. कन्हैया पटेल ने एक अनोखा फैसला लिया। उन्होंने बची हुई मादा और नर घड़ियाल को प्राकृतिक माहौल देने के लिए बाड़े में दो ट्रॉली बालू डलवाई। मादा घड़ियाल ने इसी बालू में ढाई फीट गहरा गड्ढा कर अंडे छुपाए, जिनसे 60-70 दिनों बाद ये बच्चे निकले। डॉक्टरों के मुताबिक, घड़ियाल के बच्चों का जेंडर रेत के तापमान पर निर्भर करता है; तापमान ज्यादा हो तो मादा और कम हो तो नर घड़ियाल पैदा होते हैं।
7 दिन तक बिना खाए रहेंगे बच्चे, डॉक्टरों की स्पेशल टीम तैनात
भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार जन्म के शुरुआती 7 दिनों तक ये बच्चे कुछ भी नहीं खाते हैं, क्योंकि अंडे की जर्दी से ही इन्हें शुरुआती एनर्जी मिलती है। महज 25 से 30 ग्राम वजन के इन बच्चों को एक हफ्ते बाद छोटी मछली, चिकन कीमा और विटामिंस दिए जाएंगे। फिलहाल इन नन्हे मेहमानों को चील-कौवों जैसे शिकारी पक्षियों से बचाने के लिए पूरे बाड़े को हरी जाली से कवर किया गया है। साथ ही, दो डॉक्टरों की देखरेख में 24 घंटे स्टाफ तैनात है और तालाब में पंप से लगातार ठंडा पानी डाला जा रहा है ताकि बच्चों को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती रहे।