Kartik month 2024 : सनातन धर्म में कार्तिक मास में तुलसी पूजा को बहुत पुनीत और मनोकामना पूर्ण करने वाला बताया गया है। तुलसी का धार्मिक और स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्व है। आयुर्वेद में तुलसी को संजीवनी कहा गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, तुलसी का पौधा मां तुलसी का रूप है। देवी तुलसी, भगवान विष्णु के एक रूप भगवान शालिग्राम की पत्नी हैं। विष्णु जी ने देवी तुलसी को यह वरदान दिया था कि जिस पूजन में उनकी उपस्थिति नहीं होगी, उस पूजन को भगवान विष्णु स्वीकार नहीं करेंगे। तुलसी का बहुत कोमल और अति संवेदनशील होता है। इस पौधे को लेर कुछ विशेष प्रकार की सावधानियों के बारे में धर्म ग्रंथों में बताया गया है। आइये जानते है।
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तुलसी पूजा से जुड़े कुछ जरूरी नियम
धर्म ग्रंथो में यह बताया गया है कि मंगलवार, रविवार और एकादशी तिथि के दिन तुलसी के पौधे में जल नहीं अर्पित करना चाहिए। साथ ही इस दिन तुलसी का स्पर्श करने की भी मनाही है। मान्यता है कि एकादशी तिथि के दिन माता तुलसी भगवान विष्णु के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। इसलिए ऐसा करने से माता के क्रोध का सामना भी करना पड़ता है और जीवन में कई प्रकार की समस्याएं भी आती है। इस दिन तुलसी के पत्तों को नहीं तोड़ना चाहिए
शास्त्रों में यह भी बताया गया है कि चंद्र व सूर्य ग्रहण और सूर्यास्त के बाद तुलसी के पत्तों को नहीं तोड़ना चाहिए। इससे भी मां तुलसी क्रोधित हो जाती हैं और उनके क्रोध का सामना व्यक्ति को करना पड़ता है।
तुलसी के पौधे में अपवित्र जल नहीं डालना चाहिए। इससे पौधा मुरझा जाता है। इसी प्रकार तुलसी के पौधे के समीप जूते चप्पल, झाड़ू, डस्टबिन नहीं रखना चाहिए। इन सब का पौधे के ऊपर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।