पर्दाफाश न्यूज़ ब्यूरो महराजगंज:: भारत-नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सोनौली सीमा देश का सबसे बड़ा स्थल मार्ग नाका माना जाता है, जहाँ प्रतिदिन हजारों भारतीय व विदेशी पर्यटक आवाजाही करते हैं। इसके बावजूद सीमा पर पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव बना हुआ है। लंबी चेकिंग प्रक्रिया, जाम और इमिग्रेशन दफ्तरों की धीमी कार्यप्रणाली के चलते कई विदेशी यात्रियों ने नेपाल यात्रा ही रद्द करनी शुरू कर दी है। इसका सीधा असर नेपाल के सीमावर्ती बाजारों और लुम्बनी जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पड़ रहा है।
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ग्रुप पर्यटकों को सीमा पार करने में दिनभर लग रहा समय बड़ी चिंता बन गया है। इमिग्रेशन, एसएसबी और नेपाल प्रशासन की जांच-पड़ताल में दिन में औसतन 4 घंटे तो लग ही जाते हैं, जबकि जाम बढ़ जाए तो पूरी प्रक्रिया 6 से 8 घंटे तक खिंच जाती है। कई बार यात्रियों का पूरा दिन सिर्फ सीमा पार करने में निकल जाता है।
नेपाल के पर्यटन क्षेत्र को भारी नुकसान
गया के गाइड अजित कुमार बताते हैं कि देरी और अव्यवस्थाओं के कारण बड़ी संख्या में विदेशी यात्री अपनी नेपाल बुकिंग कैंसिल कर रहे हैं। इससे नेपाल के पर्यटन उद्योग को बड़ा आर्थिक नुकसान हो रहा है।
उन्होंने बताया कि एक यात्री के वीजा पर 4320 नेपाली रुपये, लुम्बनी विकास कोष के 700 रुपये टिकट और होटल उद्योग का अलग से नुकसान हो रहा है।
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कुशीनगर के गाइड मनोज प्रजापति ने कहा कि अगर टूरिस्ट बसों की चेकिंग एक ही स्थान पर हो और जाम से राहत मिले, तो स्थिति काफी सुधर सकती है। समय बर्बाद होने की वजह से टूर ऑपरेटर जबरन टूर कैंसिल कर रहे हैं।
वाराणसी के गाइड जैकी ने बताया कि सोनौली सीमा से सबसे अधिक पर्यटक लुम्बनी की ओर जाते हैं। शार्क देशों के यात्रियों के लिए नेपाल वीजा फ्री है, लेकिन अन्य देशों के पर्यटकों को वीजा लेना पड़ता है। इस मार्ग से कंबोडिया, म्यांमार, लाओस, थाईलैंड, वियतनाम और कोरिया के पर्यटक सबसे अधिक आते हैं।
स्थानीय गाइडों और टूर ऑपरेटरों ने भारत-नेपाल दोनों सरकारों से मांग की है कि सीमा पर सुविधाएं बढ़ाई जाएं और चेकिंग प्रक्रिया को सरल बनाया जाए, ताकि पर्यटन उद्योग को बचाया जा सके।