पर्दाफाश न्यूज़ ब्यूरो महराजगंज :: भारत-नेपाल की सबसे व्यस्त और अंतरराष्ट्रीय महत्व वाली सोनौली सीमा पर नेपाल एजेंट संघ के एक नए फैसले ने सीमा क्षेत्र में हलचल मचा दी है। भैरहवा स्थित नेपाल भंसार (कस्टम) कार्यालय में भारतीय नागरिकों के प्रवेश पर प्रभावी रोक लगाए जाने से वर्षों से वहां कार्य कर रहे सैकड़ों भारतीय एजेंट और कर्मचारी अचानक बेरोजगारी के संकट से जूझने लगे हैं। इस फैसले से सीमा के दोनों ओर व्यापारियों और एजेंटों में भारी नाराजगी है।
पढ़ें :- बार-बेंच का समन्वय स्थापित करना ही मेरा मुख्य उद्देश्य: एसडीएम कुणाल
जानकारी के अनुसार, वर्षों से नेपाल एजेंट संघ अपने अधिकृत प्रतिनिधियों के माध्यम से भंसार कार्यालय में कार्य कराता रहा है। पांच हजार से लेकर 25 हजार रुपये अथवा उससे अधिक मूल्य का फुटकर सामान नेपाल ले जाने वाले भारतीय व्यापारी और आम नागरिक एजेंटों की सहायता से आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर स्वयं भंसार कार्यालय पहुंचकर माल पास कराते थे। इसी व्यवस्था से बड़ी संख्या में भारतीय युवाओं की आजीविका जुड़ी हुई थी।
लेकिन शुक्रवार से लागू नई व्यवस्था के तहत नेपाल एजेंट संघ ने स्पष्ट कर दिया कि अब भंसार कार्यालय में केवल नेपाल की नागरिकता रखने वाले और एजेंट संघ द्वारा अधिकृत व्यक्ति को ही प्रवेश मिलेगा। इतना ही नहीं, नेपाल स्थित भारतीय दूतावास द्वारा जारी परिचय पत्र रखने वाले भारतीयों को भी कार्यालय में प्रवेश और काम करने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
इस फैसले के बाद वर्षों से सीमा क्षेत्र में कार्यरत सैकड़ों भारतीय नागरिकों की रोजी-रोटी पर संकट गहरा गया है। कई नेपाली युवा भी इस निर्णय से प्रभावित बताए जा रहे हैं।
भारतीय एजेंटों का कहना है कि यह फैसला भारत-नेपाल के दशकों पुराने मैत्रीपूर्ण संबंधों और खुली सीमा की भावना के विपरीत है। उनका आरोप है कि बिना किसी पूर्व सूचना या वैकल्पिक व्यवस्था के लागू किए गए इस निर्णय ने सैकड़ों परिवारों के सामने रोजगार का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।
पढ़ें :- डिंपल यादव ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप, पूछा-क्या यही आपका नया भारत है, जहां बेटियों के कपड़े फाड़े जाते हैं?
सीमा क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर लोगों में भारी आक्रोश है। व्यापारिक हलकों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो विरोध प्रदर्शन तेज हो सकता है, जिससे सीमा क्षेत्र का माहौल प्रभावित होने की आशंका है।
महराजगंज ब्यूरो प्रभारी विजय चौरसिया की रिपोर्ट