नई दिल्ली। देश के मशहूर उद्योगपति मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) की पत्नी नीता अंबानी (Nita Ambani) एक बार फिर अपने पहनावे को लेकर चर्चा में आ गई हैं, लेकिन इस बार उनकी सोने-चांदी के तार से बनी साड़ी या हीरे- पन्ने के गहनों ने लोगों का ध्यान नहीं खींचा, बल्कि राम नाम वाली उनकी साड़ी ने दिल जीत लिया। जिसे पुरस्कार विजेता आर्टिजन श्री हरिशंकर मेहर ने तैयार किया है।
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नीता अंबानी (Nita Ambani) का राम नवमी के मौके पर बेहद सुंदर साड़ी लुक सामने आया, जो सिर्फ फैशन नहीं, आस्था और परंपरा का खूबसूरत संगम है। जिसकी हर एक डिटेल खास होने के साथ ही यूनिक भी है। तभी तो उनकी इस साड़ी को बनाने में दो साल का समय लग गया, जिस पर अलग-अलग भाषा में भगवान राम का नाम लिखा है, जो ही इस लुक का पूरा सार है।
दरअसल, नीता ने ओडिशा के कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (KISS) में ह्यूमैनिटेरियन अवार्ड 2025 से सम्मानित होने पर इस साड़ी को पहना था। जिसके पीछे की सोच और उसके डिजाइन की बारीकी उनके लुक की खासियत बन गई। जिसकी डिटेल्स लोगों का दिल जीत रही हैं, तो चलिए उनके लुक की खासियत के बारे में जानते हैं।
नीता अंबानी ने ओडिशा में मिल रहे इस सम्मान के लिए वहां की ही पारंपरिक इकत साड़ी पहनी, जो हैंडलूम आर्ट का बेहतरीन उदाहरण है। जिसे स्वेदश ने पुरस्कार विजेता आर्टिजन श्री हरिशंकर मेहर के साथ मिलकर बनाया। इस इकत राम शिला साड़ी पर भगवान राम के नाम अलग-अलग भाषा में लिखे, जिसे बनाने में दो साल का समय लगा है।
इस साड़ी की सबसे खास बात इसके अर्थी टोन है, यानी इसके कलर्स नेचुरल (प्राकृतिक) हैं। मिट्टी जैसा रंग इसे बेहद रॉयल और सटल बनाता है। जिसे फैब्रिक पर दिख रहा पैटर्न राम शिला से इंस्पायर्ड है, जिसमें भगवान राम का नाम लिखा है। पल्लू पर ओड़िया लिपि में मंत्र लिखे गए हैं, जो ट्रेडिशनल इकत डिजाइन के साथ इतनी सफाई से ब्लेंड हो रहे हैं कि ये आर्ट के साथ स्पिरिचुअल स्टेटमेंट बन गया और नीता का देसी लुक दिल जीत गया।
ओडिशा की इकत (बंधा) साड़ी को बनाने के लिए टाई- एंड-डाई तकनीक का इस्तेमाल होता है। जिसमें सूती या रेशमी धागों को बुनाई से पहले रंगा जाता है। धागों के पैटर्न के अनुसार बांधकर मल्टीकलर पाने के लिए प्रकिृया दोहराई जाती है। फिर इसे सुखाया जाता है। अंत में रंगीन ताने-बाने को पारंपरिक शटल-पिट करघे पर बहुत सटीकता से बुना जाता है ताकि पैटर्न बिल्कुल सही जगह पर आए।
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इकत तकनीक की जड़ें करीब 2000 साल पुरानी मानी जाती हैं। पुराने समय में इसे राजघरानों और मंदिरों में लिए बनाया जाता था। इसे सबसे जटिल तकनीक में से एक माना जाता है, क्योंकि इसमें डिजाइन बुनाई से पहले ही धागों पर तय होते हैं। पहले केवल प्राकृतिक रंगों का उपयोग होता था, लेकिन अब रासायनिक रंगों का भी इस्तेमाल होने लगा है। 2007 में ओडिशा इकत को जीआई टैग मिल चुका है।
नीता अंबानी की साड़ी में ब्राउन के शेड्स देखने को मिल रहे हैं, जिसके बर्डर पर बेल बनाकर खूबसूरत डिटेलिंग की, तो बाकी की साड़ी का काम भगवान राम से जुड़ा है। ऐसे में उन्होंने साड़ी को ही हाललाइट में रहने देने के लिए मैचिंग शेड वाला सिंपल ब्लाउज पेयर किया। जिससे सारी अटेंशन उनकी साड़ी पर रही, जिसके जरिए उन्होंने हेरिटेज को सम्मान देने के साथ हैंडलूम और कारीगरों की कला को सेलिब्रेट किया।
अपने लग्जरी जूलरी कलेक्शन के लिए मशहूर नीता ने इस बार बंधा इकत राम शिला साड़ी के साथ सिंपल जूलरी पहनी। उन्होंने दो लेयर वाला खूबसूरत मोतियों का हार पहना, जो उनकी साड़ी के मिट्टी जैसे रंगों को कॉम्प्लिमेंट कर रहा है। इसके साथ ही उन्होंने हीरों से जड़े फ्लोरल पैटर्न बाले इयरिंग्स पहने, तो हाथों में गोल्डन और मरून चूड़ियां साड़ी के कलर्स के साथ बखूबी जची। जिसे फाइनल टच उन्होंने बिंदी और बन बनाकर दिया। कुल मिलाकर नीता का लुक दिखाता है कि आउटफिट सिर्फ खूबसूरती नहीं, बल्कि कहानी, संस्कृति और भावनाएं भी बयां करने का तरीका है।